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सुनील मिश्रा. इंदौर28 मिनट पहले
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हमारे उत्थान के लिए हमारा आचरण महत्वपूर्ण है। आचार संहिता का पहला सूत्र है सत्य और असत्य को पहचानो। श्रीकृष्ण ने पूरे समय यही सिखाया कि हमें सत्य और असत्य की समझ होना चाहिए। सही और गलत का, धर्म और अधर्म का, न्याय और अन्याय का बोध हमें सजग बनाता है।
गीता भवन में चल रही भागवत कथा में यह बात वृंदावन के संत महामंडलेश्वर स्वामी प्रणवानंद सरस्वती ने सोमवार को कही। कथा में बड़ी संख्या में श्रोता आ रहे हैं। महाराजश्री ने कहा कि हमारे आसपास बहुत नकारात्मक तथा हमें गलत दिशा में ले जाने वाला वातावरण हो सकता है, उससे सजग रहें। असत्य, अन्याय को जीवन से विदा कर देना चाहिए और सत्य, धर्म, न्याय को अपना लेना चाहिए। श्रीकृष्ण ने ग्वाल-बालों से कहा सहनशील तथा परोपकारी बनो। सहनशील व्यक्ति बड़े-बड़े कष्ट हंसते-हंसते सह लेता है, वह टूटता नहीं, हताश नहीं होता।
श्रीकृष्ण ने दूसरों का सम्मान करने की सीख दी
महाराजश्री ने कहा कि भूख को सहने वाला कभी चोरी नहीं करता। अपने भाव पर नियंत्रण करने वाला व्यक्ति कभी बलात्कारी अथवा हिंसक नहीं होता। श्रीकृष्ण ने दूसरे का सम्मान करना सिखाया। श्रीकृष्ण गृहस्थ बने, रुक्मिणी के साथ उनका पहला विवाह हुआ। कृष्ण ने रुक्मिणी का हरण नहीं किया था, उन्होंने केवल रुक्मिणी की इच्छा का सम्मान करते हुए उनको स्वीकार किया था, क्योंकि रुक्मिणी, कृष्ण के साथ विवाह करना चाहती थी।
रुक्मिणी हरण का प्रसंग सुनाया
कथा के अनुसार रुक्मिणी के बड़े भाई रुक्मिणी का विवाह शिशुपाल के साथ करना चाहते थे। रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण से प्रार्थना की थी कि आप आकर सबके सामने वीरतापूर्वक मुझे ले जाइए। मैं शिशुपाल के साथ विवाह करना नहीं चाहती हूं। भगवान श्रीकृष्ण ने उसको स्वीकार किया।
भागवत कथा में गीता भवन ट्रस्ट के मंत्री रामविलास राठी, गोपाल दास मित्तल, त्रिलोकीनाथ कपूर एवं ढींगरा परिवार ने भगवान का पाठपूजन किया।
कथा से पहले रुद्राभिषेक
कथा के पहले गीता भवन परिसर स्थित शिव मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच रुद्राभिषेक हुआ। उसमें रामविलास राठी, गोपाल दास मित्तल, त्रिलोकीनाथ कपूर एवं कई भक्तों ने हिस्सा लिया।
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