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भोपाल17 मिनट पहले

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मिसरोद इलाके में एक रेलवे कर्मचारी को शातिर जालसाज़ ने मकान बेचने के नाम पर 9 लाख रूपए का चूना लगा दिया। आरोपी ने ओएलएक्स पर मकान बेचने का विज्ञापन देकर वारदात को अंजाम दिया है। 58 लाख रूपए में मकान का सौदा कर एग्रीमेंट कर लिया था। 22 लाख रूपए एडवांस रकम भी ले ली थी। लेकिन जब रजिस्ट्री कराने का वक्त आया तो धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। आरोपी जालसाज़ ने दूसरे के मकान को अपना बताकर ठगी की वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने आवेदन जांच के बाद आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।

एएसआई सुधाकर शर्मा ने बताया कि रेलवे कॉलोनी हबीबगंज निवासी रामेश्वर सिंह (57) रेलवे में कर्मचारी हैं। उन्होंने अप्रैल महीने में ओएलएक्स पर एक मकान बेचने का विज्ञापन देखा था। इस कारण उन्होंने अपने परिचित प्रॉपर्टी ब्रोकर लीलाधर सिंह के माध्यम से ओएलएक्स पर दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क कर मकान खरीदने की इच्छा जताई थी। इस पर उक्त मोबाइल नंबर धारक ने खुद को चिनार उपवन दानिश नगर मिसरोद में स्थित उक्त मकान का मालिक बताया और मकान देखने बुलाया। इसके बाद रमेश्वर सिंह ने मकान देखा। फरियादी को मकान पसंद आ गया। इसी साल 22 अप्रैल को खुद को मकान मालिक संपत पाटिल भाऊ बताने वाले आरोपी ने 58 लाख रूपए में मकान का सौदा कर लिया। एग्रीमेंट के दौरान उन्होंने जालसाज़ को नौ लाख रुपए केश और 13 लाख रुपए चेक दे दिया।

आरोपी ने मकान के असल मालिक संपत से कम में सौदा कर लिया था। इसके बाद में रामेश्वर से 58 लाख रुपए में मकान का सौदा तय कर लिया। एडवांस के तौर पर मिला 13 लाख रुपए का चेक भी आरोपी ने संपत को ही दे दिया था, जो उन्होंने केश करा लिया था। नकद नौ लाख जालसाज़ ने हड़प लिए। फरियादी को शक न हो इसके लिए उसने मकान के असल मालिक संपत के आधार-पेन कार्ड पर एडिट कर अपना फोटो लगा लिया था। इन्हीं फर्जी दस्तावेज के आधार पर उसने फरियादी से एग्रीमेंट किया था। जब मकान की रजिस्ट्री कराने का वक्त आया तो पता चला कि उक्त मकान का जिस व्यक्ति से सौदा हुआ था वह संपत पाटिल नहीं बल्कि कोई जालसाज़ था। मकान मालिक ने भी रामेश्वर से सामना होने के बाद घर बेचने से इनकार कर दिया और तब फरार हो गया।

आरोपी युवक का केवल मोबाइल नंबर ही रामेश्वर के पास है। उसने मोबाइल नंबर बंद कर लिया है। जिसके बाद में फरियादी ने थाने पहुंचकर शिकायत की। मकान के असल मालिक संपत को थाने बुलाया। उन्होंने बताया कि मकान को बेचने के लिए ओएलएक्स पर एड डाला था। इसी के माध्यम से आरोपी ने संपर्क किया था। उसने मेरे नाम से रामेश्वर से कब सौदा किया मुझे इसकी भनक तक नहीं लगी। रामेश्वर को आरोपी ने अपना रिश्तेदार बताकर मेरा मकान दिखाया था। इसके बाद में संपत ने वह रकम जो उनको चेक के माध्यम से मकान के सौदे के बाद रामेश्वर ने दी थी को लौटा दिया। नौ लाख रुपए हड़पने के आरोप में आरोपी युवक पर केस दर्ज किया गया। अब आरोपी का लगातार मोबाइल नंबर बंद जा रहा है। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने जिस नंबर का इस्तेमाल किया वह इंदौर में किसी विकास शुक्ला के नाम पर उठा था।

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