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ओजस पालीवाल. इंदौर.6 मिनट पहले
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मनुष्य को धन नहीं धर्म साथ देता है, इसलिए अनीति से कमाए गए धन को मत सराहो। एक न एक दिन वो धन दुःख ही देता है। चार पुरुषार्थों में सबसे पहले धर्म ही आता है। इसके पश्चात ही अर्थ, काम और मोक्ष आते हैं अर्थात धर्म के अनुसार अर्थ प्राप्त करो और मोक्ष प्राप्त करने के लिए काम करो। परमपिता परमात्मा ने यह मनुष्य शरीर अत्यंत कृपा करके दिया है। अगर यह मनुष्य जीवन लौकिकता में ही लगा रहा तो यह अत्यंत चिंतनीय है। अंत समय में मनुष्य को धन नहीं धर्म ही साथ देता है।
शहर के पीथमपुर बायपास रोड दिलीप नगर स्थित मां बगलामुखी सिद्ध पीठ शंकराचार्य मठ के अधिष्ठाता ब्रह्मचारी डॉ. गिरीशानंद महाराज ने चातुर्मास के दौरान चल रहे नित्य प्रवचन में गुरुवार को यह बात कही। महाराजश्री ने कहा कि लक्ष्मी की नहीं लक्ष्मीपति नारायण की पूजा करो। मनुष्य शरीर विषय भोग के लिए नहीं मिलता। विषय सुख तो केवल फलमात्र के लिए स्वर्ग सुख जैसे हैं, अंत में इसमें तो दु:ख ही दु:ख है। मनुष्य शरीर प्राप्त करके भी जो मनुष्य विषय भोगों में लगा रहता है, वह अमृत देकर बदले में विष ले रहा है। मनुष्य शरीर पुण्य कार्य और परमात्मा की आराधना करने के लिए मिला है। परमात्मा के दर्शन से बहुत आनंद प्राप्त होता है। इसका आनंद जिसको मिला है उसके मन पर सांसारिक दु:खों का प्रभाव ज्यादा नहीं होता।

डॉ. गिरीशानंद महाराज।
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