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गुनाएक घंटा पहले

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प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मांडवीया जी को एक पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने देश के सभी 23 अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों(AIIMS) में भर्ती, ट्रांसफर और प्रमोशन की दोषपूर्ण नीतियों की ओर केंद्रीय मंत्री का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने सभी संस्थानों के लिए संयुक्त रूप से भर्ती परीक्षा आयोजित करने, डॉक्टरों, नर्सिंग स्टॉफ एवं पैरामेडिकल स्टॉफ को एक संस्थान से दूसरे संस्थान में स्थानांतरण करने और एम्स के स्टॉफ की प्रमोशन में विसंगतियों को दूर करने की मांग की है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को लिखे पत्र में दिग्विजय सिंह ने कहा कि वर्ष 1956 में देष में पहले अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की स्थापना दिल्ली में हुई थी। भारतीय संसद द्वारा इसे स्वायत्तशासी संस्थान का दर्जा दिया गया। संस्थान में डाॅक्टरों की भर्ती, नर्सिंग स्टाॅफ एवं पेरामेडीकल स्टाॅफ की भर्ती तथा अन्य सभी पदों पर भर्ती के अधिकार एम्स के ही पास रहे। अन्य स्थानों पर एम्स नहीं होने के कारण स्थानांतरण नीति का सवाल ही नहीं था। वर्ष 2012 में देश में 6 राज्यों में नये एम्स खोले गये। इसके बाद अन्य राज्यों में भी एम्स खोले गये। इस प्रकार वर्तमान में देश में कुल 23 अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान संचालित है। जो सभी भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत आते है। इन संस्थानों में भर्ती, ट्रांसफर और प्रमोशन में कई विसंगतियां हैं।

दोषपूर्ण भर्ती नीति

सभी संस्थान अलग-अलग स्वायत्तशासी होने से फेकल्टी, चिकित्सकों एवं पेरामेडीकल स्टाॅफ की अलग-अलग भर्ती करते है, लेकिन देश के सभी एम्स में नर्सिंग आॅफीसर की भर्ती के लिये एक संयुक्त परीक्षा नाॅरसेट (NORSET) वर्ष में दो बार एम्स, नई दिल्ली द्वारा आयोजित की जाती है। इसी के आधार पर वरीयता सूची के अनुसार चयनित अभ्यर्थियों को एम्स आवंटित किये जाते है।

डाॅक्टरों एवं पेरामेडीकल स्टाॅफ के लिये सभी एम्स की संयुक्त भर्ती परीक्षा नहीं होने से प्रत्येक राज्य के संस्थान द्वारा अलग-अलग विज्ञापन निकाले जाते है। ऐसा करने से अभ्यर्थियों को सभी जगह आवेदन करना होता है तथा उसके लिये फीस भी अलग-अलग देनी होती है। एक से अधिक स्थान पर चयन हो जाने पर अन्य स्थानों की फीस व्यर्थ जाती है। वह पद भी खाली रह जाता है। जिसके लिये फिर से विज्ञापन निकाले जाते है और इस तरह बार-बार अभ्यर्थियों को फीस देनी होती है।

हाल ही में एम्स जोधपुर, एम्स पटना, एम्स रायपुर, एम्स भुबनेश्वर, एम्स नई दिल्ली द्वारा हजारों पदों के लिये अलग-अलग विज्ञापन निकाले गये है जिसमें योग्य अभ्यर्थी सभी के लिये अलग-अलग आवेदन पत्र और शुल्क देने को विवश हैं। प्रत्येक अभ्यर्थी से आवेदन शुल्क के नाम पर 3000 रूपये लिये जाते है। परीक्षा देने के लिये अभ्यर्थियों को अलग-अलग स्थानों पर परीक्षा में सम्मिलित होने के लिये आने-जाने के खर्च सहित लगभग 5000 रूपये से अधिक की राशि खर्च करनी पड़ती है। प्रत्येक अभ्यर्थी नौकरी पाने के लिये सभी 23 एम्स में विज्ञापित पदों के लिये आवेदन पत्र प्रस्तुत करता है। इस प्रकार उसे एक नौकरी पाने के लिये परीक्षाएं देने हेतु लगभग 2 लाख रूपये खर्च करने पड़ते हैं। तब जाकर कहीं एक स्थान पर उसका चयन हो पाता है, लेकिन यह भी निश्चित नहीं होता। यह एक दोषपूर्ण भर्ती नीति है। इसे बदलकर सभी एम्स के लिये एक संयुक्त बोर्ड बनाकर संयुक्त भर्ती परीक्षा आयोजित की जानी चाहिए।

दोषपूर्ण स्थानांतरण नीति

सभी 23 अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान स्वायत्तशासी हैं। इसके कारण वहां काम करने वाले डाॅक्टरों, नर्सिंग आफ़िसर, पेरामेडीकल स्टाॅफ तथा अन्य स्टाफ का एक राज्य से दूसरे राज्य के संस्थान में स्थानांतरण नही किया जाता है। एक संस्थान से दूसरे संस्थान में किसी भी कर्मचारी का समान पद पर भी स्वेच्छा से पारस्परिक स्थानांतरण नहीं किया जाता। अलग अलग राज्यों के एम्स में काम करने वाले पति-पत्नी को एक साथ रहने के लिये दोनों में से किसी एक को अपनी सेवाएं छोड़नी पड़ती है तथा उस राज्य के एम्स में काम करने के लिये पुनः भर्ती प्रक्रिया में शामिल होना पड़ता है। कर्मचारी की वहां नये सिरे से नौकरी प्रारंभ होती है और उसे पूर्व की सेवा का कोई लाभ नहीं मिलता। यह एक गंभीर दोषपूर्ण नीतिगत मामला है जिसके कारण हजारों कर्मचारी ट्रांसफर के लिये परेशान हो रहे है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों में तबादले के लिये एक स्थानांतरण बोर्ड भी गठित किया जाना चाहिए जो एक संस्थान से दूसरे संस्थान में स्थानांतरण की अनुशंसा करे।

दोषपूर्ण प्रमोशन व्यवस्था

नर्सिग ऑफिसर्स एसोसिएशन ने अवगत कराया है कि नर्सिंग केडर में सीनियर नर्सिंग ऑफिसर एवं असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिटेंडेंट के पदों में से 25 प्रतिशत पदों पर सीधी भर्ती की जा रही है। इसके कारण नर्सिंग केडर में पूर्व से पदस्थ नर्सिंग अधिकारियों को उच्च पदों पर प्रमोशन का मौका नहीं मिल पा रहा है। केडर में पहले से ही पदोन्नति के योग्य नर्सिंग ऑफिसर उपलब्ध होने के बावजूद उच्च पदों पर सीधी भर्ती करना नर्सिंग केडर के लोगों के साथ अन्याय है। इस नीति में बदलाव करके सभी उच्च पदों पर केडर से ही 100 प्रतिशत पदोन्नति की जानी चाहिए। चूॅकि दिल्ली एम्स में पहले से ही 100 प्रतिशत पदोन्नति की व्यवस्था है इसलिये अन्य राज्यों के एम्स में इसी लागू करना चाहिए।

पत्र के जरिये उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से निवेदन किया है कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों में भर्ती, स्थानांतरण एवं प्रमोशन की दोषपूर्ण नीतियों पर विचार कर उनमें जरूरी परिवर्तन करने के लिए उचित निर्देश दिए जाएं।

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