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मुकेश कचोलिया. इंदौर15 मिनट पहले
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आचार्यश्री ने श्रोताओं को प्रसाद वितरित किया।
रामद्वारा आध्यात्मिक चिकित्सालय है, जहां मन की चिकित्सा होती है। सद्गुरु सभी शिष्यों के संशय का निवारण कर देते हैं। सभी सद्गुरु संयम भक्ति के प्रकाश पुंज हैं, जो उनकी शरण में आता है उसको वे भक्ति के प्रकाश में ओत-प्रोत कर देते हैं और शिष्य को अपनी शक्ति प्रदान करके समर्थ बना देते हैं।
छत्रीबाग रामद्वारा में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मंगलवार को यह बात आचार्य जगद्गुरु स्वामी रामदयाल महाराज ने कही। मीडिया प्रभारी मुकेश कचोलिया ने बताया कि प्रतिदिन सुबह 5:30 से 6 बजे तक रामधुन, 8:30 से 9:30 बजे तक प्रवचन एवं शाम 7 से 7.30 बजे तक संध्या आरती के कार्यक्रम चल रहे हैं। आचार्यश्री की अगवानी देवेंद्र मुछाल, लक्ष्मी कुमार मुछाल, गिरधर नीमा, रामनिवास मोड़, हेमंत काकानी, रामसहाय विजयवर्गीय एवं राजेंद्र आसावा ने की।
शिष्य को स्वयं के समान बना देते हैं गुरु भी
महाराजश्री ने कहा आज की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि अधिकांश लोग गुरु को गुरु तो मानते हैं किंतु गुरु की बात नहीं मानते। ध्रुव, प्रहलाद, मीरा ने भक्ति कर राम नाम का अमृत पान किया और संसार में अमर हो गए। जैसे पानी की एक बूंद जब दरिया से सागर में मिलती है तो सागर का ही रूप ग्रहण कर लेती है, यानी सागर हो जाती है। इसी तरह गुरु भी शिष्य को स्वयं के समान बना देते हैं और इस भवसागर से पार करा देते हैं। नाम जप के बाद जीव और शिव एक ही हो जाते हैं। महाराजश्री ने कहा संत ज्ञान की सर्वोच्च अवस्था का नाम है। साधना का मर्म जिन संतों ने आत्मसात किया है उनका जीवन धन्य हुआ है। संत जहां जन्म लेते हैं, वह देश, दिशा, वार और दिन धन्य हो जाते हैं।

स्वामी रामदयाल महाराज की आरती उतारती श्रद्धालु।
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