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इंदौर29 मिनट पहले

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इंदौर के महाराज तुकोजीराव होलकर महिला अस्पताल (MTH) में गुरुवार को दो बच्चों की मौत पर जमकर हंगामा हो गया। परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही और खराब दूध पिलाने का आरोप लगाया। परिजनों का तो ये भी कहना है कि इन्हीं कारणों से यहां रोज बच्चों की मौत हो रही है।

एमटीएच अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही से नवजात बच्चों की हो रही मौतों का मामला अधिकारियों द्वारा दी गई सफाई के बाद कुछ शांत हुआ ही था कि देर शाम फिर हंगामा हो गया। दरअसल, जब पूजा के परिजन नवजात की मौत के मामले में कार्रवाई पर अड़े रहे तो उन्हें बताया गया कि इसके लिए नवजात का पोस्टमॉर्टम करवाना होगा व इसके बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

शाम 5.30 बजे उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पोस्टमार्टम कराना नहीं चाहते। इसके बाद उन्हें नवजात की डेड बॉडी सौंप दी। वे अस्पताल से करीब 1 किमी आगे गए ही थे कि हॉस्पिटल से उन्हें फोन आया कि उन्हें गलती से दूसरे बच्चे का शव दे दिया है। इस पर परिजन ने अपने नवजात के पूर्व में मोबाइल से लिए गए फोटो का मिलान किया तो वाकई डेड बॉडी दूसरे नवजात की थी।

इस पर वे भारी बारिश के बीच फिर से अस्पताल पहुंचे। इस दौरान वहां जमकर हंगामा किया। वहां स्टाफ ने बताया कि एक महिला कर्मचारी ने गलती से दूसरे नवजात की डेड बॉडी सौंप दी थी। यहां भी परिजन खूब नाराज हुए और आरोप लगाया कि पूरे मामले को शुरू से ही दबाया जा रहा है। बाद में रोते-बिलखते नवजात का शव लेकर रवाना हुए और इंदौर में ही अंतिम संस्कार किया। सूचना मिलने के बाद कांग्रेस पार्षद राजू भदौरिया हॉस्पिटल पहुंचे और डॉक्टरों सहित पूरे स्टाफ पर जमकर बरसे।

नर्स सस्पेंड, तीन डॉक्टरों को शोकाज नोटिस

एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संजय दीक्षित ने बताया कि इस मामले में नर्स मुस्कान राठौर को सस्पेंड किया है। इसके साथ ही डॉ. नीलेश दलाल, डॉ. प्रीति मालपानी और डॉ. सुनील आर्य को शोकाज नोटिस जारी किए हैं।

संभागायुक्त और कलेक्टर पहुंचे अस्पताल

अस्पताल प्रबंधन अलग-अलग कारणों से 2 बच्चों की बात मान रहा है। हंगामे के बाद कलेक्टर और संभागायुक्त भी अस्पताल पहुंचे। प्रारंभिक जांच के बाद प्रशासन ने कहा कि गुरुवार को पूजा के प्रीमेच्योर बेबी सहित दो नवजात की मौत हुई है। इन्हें सेप्टीसीमिया का इन्फेक्शन था। उसका वजन भी काफी कम था। उसके लंग्स में दूध चला गया था। शिकायत मिलने पर पुलिस की ओर से अस्पताल पहुंचे ACP बीपी शर्मा ने बताया कि प्री मेच्योर बच्ची के अलावा एक अन्य बच्चे की निमोनिया से मौत हुई है।

बता दें कि MTH में जुलाई के छह दिन में अब तक 20 बच्चों की मौत हुई हैं। पिछले महीने जून में 55 बच्चों की जान गई थी।

एडीएम बोले- फूड पॉयजनिंग से मौत की बात गलत

अस्पताल में जांच के लिए पहुंचे एडीएम (एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट) अभय बेड़ेकर ने बताया एक प्री मैच्योर बच्ची की मौत हुई है। बच्ची 10 जून को जन्मी थी और कमजोर थी। उसका जन्म सात महीने में हो गया था। अन्य मौतों के बारे में जानकारी नहीं है। खराब दूध से फूड पॉयजनिंग की बात गलत है। यदि पहले किसी तरह का घटनाक्रम हुआ है तो उसे चेक कराया जाएगा।

पुलिस ने दो बच्चियों की मौत होना बताया

एसीपी (असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस) बीपी शर्मा ने बताया कि दो मौतें हुई हैं। इनमें से एक की मौत निमोनिया व अन्य बीमारी के कारण हुई है। एक बच्चे के लंग्स में दूध चले जाने की बात सामने आई है। इसके अलावा कोई मौत नहीं है। सोशल मीडिया पर जो मैसेज चल रहा है, वो गलत है।

परिजन बोले- पाउडर सांस नली में फंसा, मेरा बच्चा मर गया

मृत बच्चे की मां ने डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाए है। उन्होंने कहा कि- मेरा बच्चा नॉर्मल था। उसे ब्लड चढ़ाया गया। इससे उसे दस्त लग गए थे। उसकी हालत खराब हो गई तो हमने डॉक्टरों को दिखाया। डॉक्टरों ने कहा बच्चा नॉर्मल है। आईसीयू के बगल में कमरे में उसे भर्ती करा दिया। कोई डॉक्टर देखने नहीं आया। उसे बॉटल चढ़ा दी। हम डॉक्टर को बुलाने जाते तो हमसे कहते हमें हमारी जिम्मेदारी मत समझाओ। रात में सिस्टर आई तो इंजेक्शन से पाउडर मुंह में डाल दिया। वो फंस गया। सांस नली चोक हो गई और मेरा बच्चा मर गया। डॉक्टर कह रहे हैं जो हो गया सो हो गया। परसो 4-5 बच्चे मरे। रोज 4-5 बच्चों की मौत हो रही है। बच्चे उल्टी कर रहे हैं। फटा दूध पिताते हैं। डॉक्टर सुनते नहीं है।

7 दिन का रिकॉर्ड सील करके जांच हो

मध्यप्रदेश कॉग्रेस कमेटी के प्रदेश सचिव राकेश सिंह यादव ने कहा कि इंदौर में एमटीएच हॉस्पिटल में लापरवाही की वजह से अनेक बच्चों की मौत के आरोप कुछ परिजन लगाए हैं। प्रशासन को एमटीएच हॉस्पिटल का पिछले 7 दिन का रिकॉर्ड सील करके जांच करना चाहिए। सच सामने आना चाहिए। दोषियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।

अस्पताल में बच्चों का डेथ रेट 8.50 से 9% के बीच

अस्पताल की एसएनसीयू यूनिट के प्रभारी और एसोसिएट प्रोफेसर सुनील आर्य ने बताया कि बच्ची की मौत फेफड़े में दूध जाने के कारण हुई है। 15 बच्चों की मौत होने की खबर पूरी तरह से भ्रामक है। पिछले सात दिनों में भी ऐसा कुछ नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा कि पूरे जिले से और कभी-कभी बाहर से भी क्रिटिकल कंडीशन में बच्चों को यहां लाया जाता है। कई बार अस्पताल में ही जन्म लेने वाले बच्चों की हालत भी नाजुक होती है। ऐसे में बच्चे की नेचुरल डेथ होना आम बात है।

आर्य के मुताबिक पूरे महीने की बात करें तो अस्पताल में शिशु मृत्यु दर साढ़े आठ से नौ प्रतिशत के बीच है, जिसमें अलग-अलग कारणों से बच्चों की मौत हो जाती है।

परिजन बोले- यहां रोज बच्चों की मौत हो रही

जिस बच्चे की मौत हुई है उसकी मौसी मोहिनी जाटव ने बताया कि बच्चा पूरी तरह से ठीक था। उसे सिर्फ दस्त लगे थे। इस पर डॉक्टरों ने पहले तो उसे आईसीयू में भर्ती कराने के लिए बोला। फिर आईसीयू की जगह पास वाले कमरे में रख दिया। हम यहां करीब एक महीने से हैं और यहां रोज बच्चों की मौत हो रही हैं। डॉक्टर हर बच्चे की मौत के लिए फेफड़े में दूध जमने और पेट फूलने का कारण बता रहे हैं।

6 दिन में 20 मौतें, कारण प्रीमेच्योर व इन्फेक्शन

इस मामले में कमिश्नर डॉ. पवन कुमार शर्मा, डीन डॉ. संजय दीक्षित, सुपरिटेंडेंट डॉ. पीएस ठाकुर, एचओडी डॉ. प्रीति मालपानी व यूनिट हेड डॉ. सुनील आर्य ने मीडिया को अपना पक्ष बताया। इसमें स्पष्ट किया कि 6 दिनों में 20 नवजात बच्चों की मौतें हुई हैं। जून में 55 नवजात बच्चों की मौत हुई थी।

यानी औसतन रोज 1-2 नवजात बच्चों की मौतें होती हैं जिनका कारण नवजात बच्चों का कम वजन और इन्फेक्शन ही रहता है। इसमें 40% से ज्यादा मामले आसपास के गांवों और शहरों के रहते हैं जहां से नवजात को गंभीर हालत में लाया जाता है। डॉक्टरों द्वारा उन्हें बचाने की भरसक कोशिश की जाती है।

सुपरिटेंडेंट डॉ. पीएस ठाकुर ने बताया कि खराब दूध का आरोप भी निराधार है। उक्त महिला की डिलीवरी 10 जून को हुई थी और नवजात का वजन सिर्फ 1.400 किलो था जबकि नॉर्मल स्थिति में ढाई किलो तक के नवजात में कोई परेशानी नहीं होती। वह एनआईसीयू में एडमिट था।

उसे राइस ट्यूब के जरिए फीडिंग दी जा रही थी। इसके तहत सांची दूध दिया जा रहा था जो अच्छा था। उक्त राइस ट्यूब से दूध सीधे पेट तक पहुंचता है इसलिए दूध अटकने का भी सवाल नहीं है।

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