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सागर37 मिनट पहलेलेखक: जितेंद्र तिवारी

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ये कहानी ऐसे ‘ब्लफमास्टर’ की है, जिसे सागर जिला कोर्ट ने 170 साल की सजा सुनाई है। उसने 34 लोगों से 72 लाख रुपए ठग लिए। आरोपी अभी जेल में है। दैनिक भास्कर ने मामले की पड़ताल की, तो हैरान करने वाला खुलासा हुआ। आरोपी लग्जरी लाइफ स्टाइल जीता था। महंगी कार से चलता था। विदेशों में बिजनेस होने की बात कहकर लोगों को झांसे में लेता था। कई प्रभावशाली लोगों से भी संबंध बना लिए थे। उसने पान वाले और दूधवाले तक सभी को ठगा। खास बात है कि आरोपी का सटीक पता भी मालूम नहीं चल सका है। यहां तक कि उससे पुलिस रुपए भी बरामद नहीं करा सकी।

समझते हैं कि आखिर कैसे ठगी का जाल बुना…। दैनिक भास्कर ने भैंसा गांव पहुंचकर पीड़ितों से भी बात की।

एसपी से शिकायत के बाद खुला मामला

12 अक्टूबर 2019 की बात है। सागर के कैंट क्षेत्र के रहने वाले अरविंद जाटव, इश्हाक खान, नियाज खान ने आरोपी नासिर मोहम्मद व उसके परिवार के अन्य सात सदस्यों के खिलाफ एसपी से शिकायत की। बताया- एक व्यक्ति करीब 11 महीने से अपना नाम नासिर मोहम्मद बताता है। आधार कार्ड से पता चला कि उसमें उसका नाम नासिर राजपूत लिखा है। 17 सितंबर 2019 को वह भोपाल जाने का कहकर गया था, फिर नहीं लौटा। कैंट थाना पुलिस ने केस दर्ज कर जांच में लिया। इसके बाद धीरे-धीरे भैंसा और सदर के रहने वाले 34 पीड़ित सामने आए। पुलिस ने 19 दिसंबर 2020 में कर्नाटक के गुलबर्गा से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

पीड़ितों ने बताया- कैसे बनाया शिकार

80 हजार लौटाकर जताया भरोसा, 8.50 लाख लेकर फरार

ग्राम भैंसा के रहने वाले इश्हाक मोहम्मद पूर्व आर्मीमैन हैं। इश्हाक ने बताया कि फरवरी 2019 में बन्ने खान चाय दुकान पर नासिर से मुलाकात हुई थी। पहचान होने के बाद बातचीत होने लगी। एक दिन आरोपी अपने घर ले गया। यहां परिवार के सदस्यों से मिलवाया। नासिर ने बताया था कि उसका भतीजा और बेटा कंबोडिया, दुबई और वियतनाम में कपड़े का व्यापार करते हैं। वह खुद बिल्डिंग बनाने का काम भी करता है।

जान पहचान होने के कारण आरोपी की बेटी का एडमिशन डीपीएस स्कूल में कराया था। आरोपी का व्यवहार अच्छा और बड़े स्तर का था। देखने में वह बड़ा आदमी लगता था। इश्हाक ने बेटे के लिए सिलाई सेंटर खुलवाने की बात कही, तो नासिर ने मदद करने की बात कही थी। 80 हजार रुपए भी कुछ दिन बाद लौटा दिए। मार्च 2019 से सितंबर 2019 तक कई बार में 8.50 लाख रुपए उधार लिए। फिर लौटाए नहीं।

बाबू को पैसे देने, बैंक में टैक्स भरने के नाम पर ठगा

दूसरी शिकायतकर्ता पुरुषोत्तम ने बताया कि भैंसा में उसकी ससुराल है। इसी के चलते आरोपी नासिर से पहचान हो गई। नासिर ने खुद को गुजरात का रहने वाला बताया। 2019 की शुरुआत में नासिर बोला- उसका और उसके भाई के बीच बंटवारा हो गया है। उसका पैसा आरबीआई बैंक में जमा है, इसलिए बैंक का टैक्स जमा करने 1.57 लाख रुपए की जरूरत है। पैसों के बदले कार का एग्रीमेंट कराने का बोला। कार का एग्रीमेंट कराकर 1.57 लाख रुपए दे दिए।

करीब 8 से 10 दिन बाद पैसा मांगे, तो उसने कहा कि रुपए आए नहीं हैं। बैंक में पैसे निकालने के लिए 50 हजार रुपए बाबू को देना है, तो पैसे निकल आएंगे। उसके कहने पर 50 हजार रुपए और दे दिए। इसके बाद बेटी की फीस भरने के लिए 45 हजार रुपए मांगे। इस तरह कुल 3 लाख रुपए ले लिए। रुपए वापस मांगने पर 17-18 सितंबर 2019 में डेढ़-डेढ़ लाख के दो चेक दिए, जो बैंक में बाउंस हो गए। इसी बीच, नासिर के भागने का पता चला।

बेटे को बिजनेस कराने, बेटी की शादी में मदद का झांसा

क्लीनिंग मटेरियल दुकान संचालक नियाज मोहम्मद ने बताया कि इश्हाक मोहम्मद के जरिए आरोपी नासिर से पहचान हुई थी। फिर मेलजोल बढ़ा। इस बीच, नासिर ने फैक्ट्री में मशीन लगाने के लिए 3.59 लाख रुपए उधार मांगे, लेकिन नियाज ने इनकार कर दिया। कहा- बेटी की शादी के लिए पैसा रखे हैं। इस आरोपी ने कहा कि शादी का टेंशन मत लो। बच्ची की शादी में खाना और फर्नीचर मैं अपनी तरफ से करूंगा। साथ ही, बेटे को व्यापार करने कंबोडिया भेजने की बात भी कही। झांसे में आकर पैसे उधार दे दिए। जब भी पैसे वापस मांगे, बहाने बनाकर टालता रहा।

लग्जरी लाइफ स्टाइल व सफेदपोशों के साथ रहकर जीता भरोसा

आरोपी नासिर मोहम्मद उर्फ नासिर राजपूत बेहद शातिर है। वह ऑटो से सागर आया था। भैंसा गांव में किराए से रहने लगा। खुद को व्यापारी बताया था। लोगों से कहा कि गुजरात में उसने 7.85 करोड़ का बंगला बेचा है, जिसका पैसा आने वाला है। धीरे-धीरे लोगों के बीच पहचान बना ली। वह लग्जरी लाइफ स्टाइल जीता था।

किराए की लग्जरी कार लेकर भैंस और सदर इलाके में घूमकर लोगों को ठाठ बताता था। साथ ही, क्षेत्र के चर्चित और राजनीति से जुड़े लोगों से पहचान बनाई। लोगों का भरोसा जीतने के लिए उनके साथ उठने-बैठने लगा। इसके बाद नासिर ने ठगी का जाल बिछाना शुरू किया। कपड़ा फैक्ट्री खुलवाने के नाम पर किसी से 2 रुपए, तो किसी से 5 लाख रुपए उधार लिए। उसने लोगों को ज्यादा पैसे देने और बिजनेस में पार्टनर बनाने का झांसा दिया।

आरोपी निसार के साथ के महिला और बच्ची भी थी, जिसे वह अपनी पत्नी और बेटी बताता था। सागर से फरार होने के बाद दोनों का भी पता नहीं है। हालांकि पत्नी को आरोपी नहीं बनाया है।

आरोपी निसार के साथ के महिला और बच्ची भी थी, जिसे वह अपनी पत्नी और बेटी बताता था। सागर से फरार होने के बाद दोनों का भी पता नहीं है। हालांकि पत्नी को आरोपी नहीं बनाया है।

मोबाइल पर बैंक पासबुक दिखाता, देता था चेक

वह लोगों को बताता था कि उसका गारमेंट्स व कपड़ों का बिजनेस है। उसके बेटे साउल व दाउद कंबोडिया, वियतनाम और दुबई में गारमेंट्स का बिजनेस करते हैं। वह सागर में भी कपड़ा फैक्ट्री खोल रहा है, जिसका निर्माण भैंसा में शुरू कराया था। उसने कंबोडिया से आए बेटे साउल से भी लोगों को मिलवाया। वह कभी बैंक के काम, कभी फैक्ट्री निर्माण तो कभी परिवार की जरूरत के लिए पैसे लेता रहा। भरोसा दिलाने के लिए मोबाइल पर बैंक पासबुक दिखाता था। बोलता था- जल्द ही खाते में 7.85 करोड़ रुपए आ जाएंगे, तो सभी के लौटा देगा। यदि कोई रुपए देने में आनाकानी करता, तो उसे वह चेक दे देता था।

किराना से लेकर दूध वाले के पैसे लेकर भागा

नासिर ने दुकानदारों के बीच पहचान बनना शुरू कर दी। वह परिचितों के साथ दुकानों पर जाता था। किराने का सामान उधार ले आता था। एक साल तक वह घर के उपयोग का सामान और दूधवाले से दूध लेता रहा। दुकानदारों को पैसा आने पर ज्यादा देने का झांसा देता रहा। यही नहीं, वह सिगरेट पीने का शौकीन था, तो सिगरेट भी उधार लेकर पीता था।

बन्ने खां भैंसा गांव में किराने की दुकान चलाते हैं। उन्होंने बताया कि आरोपी निसार उनकी दुकान से सामान उधार लिया था। उनके करीब 10 से 12 हजार रुपए हैं।

बन्ने खां भैंसा गांव में किराने की दुकान चलाते हैं। उन्होंने बताया कि आरोपी निसार उनकी दुकान से सामान उधार लिया था। उनके करीब 10 से 12 हजार रुपए हैं।

तीन से ज्यादा भाषाएं जानता है आरोपी

आरोपी नासिर तीन से ज्यादा भाषाएं जानता है। वह हिंदी, अंग्रेजी के अलावा गुजराती बोलता है। इसके अलावा, लोगों ने पुलिस को बताया था कि वह कश्मीरी और कन्नड़ भी बोलता है। उसका रौब और बात करने का तरीका ऐसा था कि हर कोई भरोसा कर लेता था। इसी दौरान, आरोपी ने सागर में अलग-अलग बैंकों में तीन खाते भी खुलवा रखे हैं।

तीन आधार मिले, स्थाई पता आज तक नहीं मिला

पुलिस ने नासिर के पास से तीन राज्यों के आधार जब्त किए गए थे। ये सागर, गुजरात और कर्नाटक के है। पुलिस ने तीनों जगह उसके परिवारवालों को तलाशा, लेकिन तीनों ही पते गलत निकले। अभी तक पुलिस आरोपी का स्थाई पता नहीं खोज पाई है। वह कहां का रहने वाला है, अब तक किसी को नहीं पता। वह अलग-अलग जगह रहकर धोखाधड़ी करता रहा। गिरफ्तारी से पहले कर्नाटक में भी कई लोगों के साथ धोखाधड़ी कर चुका था।

सागर में एक साल रहा, बनवा लिया स्थाई निवास प्रमाण पत्र

आरोपी नासिर ने सागर में किराए के मकान में रहने के दौरान स्थाई निवास प्रमाण पत्र बनवा लिया था। उसने तहसील कार्यालय में फर्जी स्वघोषणा पत्र दिया था। नियमानुसार स्थाई निवास प्रमाण पत्र के लिए मध्यप्रदेश में लगातार 10 साल निवास करना जरूरी होता है। आरोपी ने घोषणा पत्र में खुद को सागर में 12 साल से रहने की बात कही थी। पुलिस ने फर्जी निवास पत्र जब्त भी किया था।

आरोपी निसार के पास से तीन आधार कार्ड मिले थे। इनमें से एक कर्नाटक, दूसरा सागर और तीसरा गुजरात का बना हुआ है।

आरोपी निसार के पास से तीन आधार कार्ड मिले थे। इनमें से एक कर्नाटक, दूसरा सागर और तीसरा गुजरात का बना हुआ है।

ये आधार कार्ड सागर से बना हुआ है। आरोपी निसार ने फर्जी दस्तावेजों की मदद से इसे बनवाया है।

ये आधार कार्ड सागर से बना हुआ है। आरोपी निसार ने फर्जी दस्तावेजों की मदद से इसे बनवाया है।

इस आधार कार्ड पर कर्नाटक के गुलबर्गा का पता डला है। इस पते पर जब पुलिस पहुंची, तो वहां कोई नहीं मिला।

इस आधार कार्ड पर कर्नाटक के गुलबर्गा का पता डला है। इस पते पर जब पुलिस पहुंची, तो वहां कोई नहीं मिला।

IMEI नंबर से पकड़ाया आरोपी नासिर

जांच अधिकारी एसआई संतराम राठौर ने बताया कि नासिर ने सागर से फरार होने के बाद सभी मोबाइल नंबर बंद कर लिए थे। उसके घर से जब्त तीनों राज्यों के आधार पर दर्ज पता भी फर्जी निकले। ऐसे में पुलिस के सामने आरोपी की लोकेशन पता कर गिरफ्तार करना चुनौती था। इस बीच, पता चला कि आरोपी नासिर ने सागर में मोबाइल खरीदा था। पुलिस उसी मोबाइल शॉप पर पहुंची। खरीदे गए मोबाइल का बिल निकलवाया। इस पर आईएमईआई (इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी) नंबर दर्ज था।

साइबर सेल ने IMEI नंबर को ट्रैक किया। इसी के आधार पर नासिर की लोकेशन कर्नाटक के गुलबर्गा में मिली। इसके बाद पुलिस गुलबर्गा पहुंची। सात दिनों तक पुलिस कर्नाटक में डेरा डाले रही। स्थानीय पुलिस की मदद से आरोपी का पता निकाला। मकान पर दबिश दी। आरोपी नासिर छत पर छिप गया। आखिरकार 19 दिसंबर 2020 को आरोपी नासिर को दबोच लिया।

नहीं मिली जमानत, परिवार भी नहीं आया सामने

नासिर सागर की केंद्रीय जेल में बंद है। वह 2 साल 6 महीने 9 दिन जेल में रहा। बताया जाता है कि सागर में रहने के दौरान एक महिला और दो बच्चे रहते थे। महिला को वह अपनी पत्नी बताता था। नासिर के जाने के बाद महिला और बच्चों का भी पता नहीं चला। खास है कि जेल में रहने के दौरान परिवार का कोई भी सदस्य न तो मिलने आया और न ही प्रकरण में सामने आया। पुलिस कार्रवाई में आरोपी के पास से रुपए भी जब्त नहीं हुए। बैंक खाते भी खाली मिले थे।

निसार खान की पहली तस्वीर पुरानी है। दूसरी तस्वीर तब की है जब उसे हाल ही में कोर्ट में पेश किया गया था। उसकी सफेद दाढ़ी थी। बाल भी सफेद हो चुके हैं।

निसार खान की पहली तस्वीर पुरानी है। दूसरी तस्वीर तब की है जब उसे हाल ही में कोर्ट में पेश किया गया था। उसकी सफेद दाढ़ी थी। बाल भी सफेद हो चुके हैं।

हर मामले में सुनाई 5 साल की सजा, जो 170 साल चलेगी

कैंट थाना क्षेत्र के करीब चार साल पुराने मामले में कोर्ट ने 28 जून को फैसला सुनाया। अष्टम अपर सत्र न्यायाधीश अब्दुल्लाह अहमद की कोर्ट ने आरोपी नासिर मोहम्मद उर्फ नासिर राजपूत को धारा 420 के तहत हर फरियादी के साथ की गई ठगी के लिए 5-5 साल की सजा सुनाई। ये सभी सजाएं अलग-अलग चलेंगी। इस तरह कुल 170 साल की जेल और प्रत्येक पर 10 हजार रुपए कुल 3.40 लाख रुपए जुर्माना लगाया। शासन की ओर से पैरवी अपर लोक अभियोजक रामबाबू रावत ने की।

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