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इंदौर28 मिनट पहले
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व्यापमं में फर्जीवाड़ा कर नौकरी पाने की शिकायत को लेकर इंदौर पुलिस हलाकान है। विजय नगर में पदस्थ इस सिपाही को पंद्रह दिन पहले एसटीएफ जब पकड़ने आई तो पुलिस को बचाव में उतरना पड़ा। कहा- इसे हम ही पेश करवा देंगे। लेकिन एसटीएफ के जाते ही सिपाही छुट्टी पर चला गया। अब DCP ने एसटीएफ को पत्र लिखकर एफआईआर और कार्रवाई की जानकारी मांगी है।
दरअसल एसटीएफ के आने के पहले इंदौर पुलिस को सिपाही की एफआईआर के बारे में पता ही नहीं था। जबकि सिपाही पर जुलाई 2022 में ही धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज सहित कई धाराओं में केस दर्ज कर लिया था। इतना ही नहीं सिपाही ने भी इंदौर के अफसरों से खुद पर दर्ज एफआईआर की जानकारी छुपाई। इसकी शिकायत दस्तावेजों के आधार पर 2013 में सरकार और सीबीआई से की गई थी, लेकिन सरकार ने मामले की जांच एसटीएफ को सौंपी।
आज पहली बार दैनिक भास्कर में पढ़िए सिपाही पर दर्ज एफआईआर की पूरी कॉपी…
विजयनगर में पदस्थ सिपाही का नाम धर्मेंद्र शर्मा है। उस परिचित द्वारा ही व्यापमं में फर्जीवाड़े की शिकायत की गई है। कहा गया है कि धर्मेंद्र ने अपनी जगह किसी और को पुलिस भर्ती परीक्षा में बैठाया था। उसने अंगूठे के निशान भी बदले थे। 2013 में शिकायत के बाद 9 साल जांच ली। 2022 में एफआईआर दर्ज की गई।

2013 से अब तक तारीखवार पढ़िए पूरी शिकायत और कार्रवाई
धर्मेंद्र शर्मा निवासी विजयनगर थाना के खिलाफ STF भोपाल में 13 जुलाई 2022 को पंकज शर्मा की शिकायत पर कार्यवाहक टीआई बीएल त्यागी ने FIR दर्ज की। जिसमें सिपाही शर्मा के साथ अन्य को भी 419, 420, 467, 468, 471 और 120 बी की धाराओ में आरोपी बनाया गया है।
शिकायत में बताया गया है कि पंकज शर्मा ने डीआईजी सीबीआई व्यापमं को शिकायत दर्ज की गई। जिसमें 2 मई 2016 को सीबीआई ने पत्र डीजीपी को भेजा। जिस पर 3 मई 2016 को जांच STF के पास पहुंची। इसमें 8 अप्रैल 2021 जांच टीआई बीएल त्यागी को सौंपी गई।
इस शिकायत में शिकायतकर्ता ने धर्मेंद्र पुत्र महावीर प्रसाद शर्मा निवासी ग्राम पोस्ट बिलगांव तहसील जौरा जिला मुरैना द्वारा व्यापम आयोजित भर्ती परीक्षा वर्ष 2013 दिनांक 15 सिंतबर 2013 को अपने स्थान पर दूसरा लड़का परीक्षा में बैठाकर शासन द्वारा धोखाधड़ी फर्जी नियुक्ति प्राप्त किया जाना लेख किया गया।
उक्त शिकायत के बाद STF ने परीक्षा फार्म के साथ अन्य डॉक्यूमेंट की जांच के साथ अंगूठे के चिन्हों को जांच के लिये अलग-अलग डिपार्टमेंट में भेजा। जिसमें 18 फरवरी 2022 को जांच प्रतिवेदन STF इकाई भोपाल को प्रस्तुत किया गया। जांच प्रतिवेदन में विशेषज्ञ द्वारा विशेषज्ञ मत 01 ओर 02 में अपना निश्चित मत देते हुए लेख किया।
विवादग्रस्त अंगूठा चिन्ह Q1और Q3 आरक्षक धर्मेंद्र शर्मा के दोनों हाथों के अंगूठे चिन्ह नहीं है। धर्मेन्द्र शर्मा के हस्ताक्षर और हस्तलेख मिलान हेतु दस्तावेज सेवा पुस्तिका जब्ती पत्रक दिनांक 29 अप्रैल 2022 प्राप्त किये गए। जिन्हें जांच हेतु ड्राफ्ट क्यू डी शाखा भोपाल दिनांक 9 मई 2022 को भेजा गया।
जिसे 10 मई 2022 को वह त्रुटि के चलते वापस मिला। प्राप्त अंगुल चिन्ह विशेषज्ञ के अभिमत से यह ज्ञात हुआ कि शिकायतकर्ता पंकज शर्मा द्वारा की गई शिकायत सही है। धर्मेन्द्र शर्मा द्वारा फर्जी परीक्षार्थी मध्यस्थों से मिलकर अनुचित तरीके से आरक्षक भर्ती परीक्षा में अपने स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को बैठाकर परीक्षा पास कर आरक्षक पद पर उत्तीर्ण हुआ।
अंगुठे की रिपोर्ट के आधार पर 419, 420, 467, 468, 471 और 120 बी के तहत प्रकरण के चलते 2 जून 2002 को प्रतिवेदन मुख्यालय को भेजा गया। जिसके बाद 7 जुलाई 2022 को धर्मेन्द्र शर्मा, सरवर व अन्य के खिलाफ केस दर्ज करने के लिये आदेशित किया गया। 13 जुलाई 2022 को मामले में केस दर्ज कर लिया गया।

7 जुलाई 2022 को धर्मेन्द्र शर्मा, सरवर व अन्य के खिलाफ केस दर्ज करने के लिये सरकार ने आदेश जारी कर दिए। 13 जुलाई 2022 को मामले में केस दर्ज कर लिया गया।
2013 में सिपाही के परिचित ने ही की थी शिकायत
पंकज शर्मा ने शिकायत में बताया कि धर्मेन्द्र शर्मा ने व्यापमं परीक्षा में सितबंर 2013 में अपने स्थान पर दूसरा लड़का परीक्षा में बैठाकर शासन को धोखाधड़ी देकर फर्जी नियुक्ति प्राप्त की। इसलिये इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई कर इन्हें दंडित किया जाए। जिसमें भविष्य में सरकार को कोई धोखा ना दे सकें। आने वाले समय में पात्र लोगों को ही अवसर मिलें। यह एक फर्जी नियुक्ति कराने वाला रैकेट है। शिकायत में दावा किया गया कि इस रैकेट में कई लोग उच्च पदों पर बैठे अफसर व नेता भी शामिल हैं। इस कारण से रैकेट बच जाते हैं।
मैंने की थी एफआईआर
मामले में एसटीएफ के कार्यवाहक निरीक्षक बीएल त्यागी ने बताया कि मामले में एफआईआर उनके द्वारा ही लिखी गई थी। जिसमें जांच अब टीआई सुभाष दश्यंकर कर रहे है। सुभाष दश्यंकर का पक्ष जानने के लिए उन्हें फोन लगाया लेकिन उन्होंने मोबाइल रिसीव नहीं किया।
STF से मांगा जवाब

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