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भोपाल11 मिनट पहले

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मेट्रो और जीजी फ्लाईओवर​​​​​​​​​​​​​​ - Dainik Bhaskar

मेट्रो और जीजी फ्लाईओवर​​​​​​​​​​​​​​

बरसात के मौसम में शहर में चल रहे 1500 करोड़ के पांच बड़े प्रोजेक्ट में बरती जा रही लापरवाही आम लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। कोलार रोड से चूना भट्टी और एमपी नगर वाले इलाके में सड़क पर गड्ढे, कीचड़ और यहां-वहां बिखरे बिल्डिंग मटेरियल के बीच ट्रैफिक चल रहा है। आम तौर पर 15 जून से निर्माण कार्यों पर रोक लग जाती है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। सभी बड़े प्रोजेक्ट सितंबर से पहले तक पूरा करने की होड़ में निर्माण कार्य जारी हैं।

मेट्रो और जीजी फ्लाईओवर​​​​​​​

  • ​​​​​​​मेट्रो प्रोजेक्ट 1200 करोड़ रुपए
  • जीजी फ्लाईओवर 126 करोड़ रुपए

कोलार सिक्स लेन

  • कोलार सिक्स लेन- 222 करोड़ रुपए

भारत टॉकीज, करोंद आरओबी​​​​​​​​​​​​​​

  • ​​​​​​​भारत टॉकीज 1 करोड़ रुपए
  • करोंद 15 करोड़ रुपए

नए शहर की सबसे व्यस्त सड़क से गुजरना मुश्किल
मेट्रो और फ्लाईओवर के कारण आरकेएमपी से एमपी नगर, वल्लभ भवन और सुभाष नगर तक करीब 4 किमी आना-जाना मुश्किल हो गया है। यह नए शहर की सबसे व्यस्त सड़क है। इस सड़क का पीसीयू 15 हजार है। इस पूरी सड़क पर गड्ढे और कीचड़ है। मेट्रो के लिए रिजर्व बैंक के पास से गुजरते नाले को रोककर पाइप बिछाए गए थे, लेकिन काम पूरा नहीं हुआ है। नतीजा अरेरा हिल्स से लेकर रिजर्व बैंक के पास तक सड़क पर पानी जमा हो रहा है।

कीचड़ के बीच हादसे की आशंका
कोलार सिक्स लेन के लिए हुई खुदाई परेशानी बन गई है। चूना भट्टी से डी मार्ट तक जगह-जगह गड्ढे हैं और बैरिकेडिंग भी नहीं है। कीचड़ के बीच गुजरते वाहन कभी भी हादसे का सबब बन सकते हैं। लेकिन जून का महीना बीत रहा है और अभी 30 प्रतिशत काम भी नहीं हुआ है। डेडलाइन अक्टूबर 2023 है।

एक महीने बाद भी डामरीकरण नहीं
भारत टॉकीज ब्रिज को रिपेयर किया गया है। 25 मई को जब ब्रिज पर ट्रैफिक चालू किया गया था, तब एक सप्ताह के भीतर डामरीकरण का वादा किया गया था। उस समय ब्रिज पर धूल उड़ रही थी और अब वहां कीचड़ हो गया है। करोंद आरओबी पर भी गड्‌ढे और कीचड़ से परेशानी हो रही है।

एक्सपर्ट व्यू – डॉ. एसपीएस राजपूत, मैनिट

​​​​​​​प्रोजेक्ट लागत का 8% साइट मैनेजमेंट पर खर्च होना चाहिए

  • जब प्रोजेक्ट का टेंडर होता है तो उसमें बारिश का मौसम जोड़कर डेडलाइन तय होती है। बरसात के मौसम में ऐसे काम न हों जिनमें सीमेंट, रेत, गिट्टी और सैंटरिंग आदि का उपयोग ना हो। बरसात में खुदाई का काम तो करना ही नहीं चाहिए।
  • कोलार रोड सिक्स लेन का काम तो बहुत ही गलत समय शुरू हुआ है। इससे बड़े इलाके के लोग परेशान हो रहे हैं। साइट पर काम शुरू करते ही एप्रोच रोड बनाकर लोगों को रास्ता देना चाहिए।
  • इन सब काम के लिए प्रोजेक्ट कॉस्ट की लागत की गणना करते समय 8 प्रतिशत राशि का प्रावधान किया जाता है। कंपनियां इसे ही बचाने की कोशिश करती हैं।

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