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भोपाल5 घंटे पहले
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मप्र की 23 हजार ग्राम पंचायतों में काम कर रहे ग्राम रोजगार सहायकों (GRS) को अब दोगुना वेतन मिलेगा। भोपाल के मोतीलाल नेहरु स्टेडियम में हुए ग्राम रोजगार सहायकों के सम्मेलन में सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा- अभी रोजगार सहायकों का वेतन 9000 प्रतिमाह है। 9000 में काम नहीं चलता इसे तत्काल 9000 से बढ़ाकर 18000 वेतन किया जाएगा।
GRS की सेवा समाप्त नहीं की जाएगी
सीएम ने अपने भाषण में कहा सबसे पहले सेवा समाप्ति की प्रथा को खत्म करना पड़ेगा गलती कोई करे और निपटाना हो तो रोजगार सहायक को ही निपटा दो। वो कत्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होती, हम आह भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम। अब रोजगार सहायकों की सेवाएं समाप्त नहीं की जा सकेंगी। बिना वकील, बिना अपील, बिना दलील सेवा समाप्त… अब यह नहीं होगा। विभागीय जांच, दूसरी जांच और बाकी चीजें कराई जाएंगी। यदि कोई गंभीर आरोप न हों तो सीधे सेवा समाप्त नहीं होगी। यह बात आपने अपनी मांग पत्र में भी कही। पूरी प्रक्रिया होगी अगर इसके बाद कोई भयानक अपराध है तो बात अलग है नहीं तो सेवा समाप्ति यह किसी कीमत पर नहीं होगी।
पंचायत सचिवों के बराबर सुविधाएं मिलेंगी
सीएम ने कहा- रोजगार सहायकों को ना अवकाश है, ना प्रसूति अवकाश। आखिर हम भी इंसान हैं हमारा भी परिवार है और इसलिए चाहे अवकाश का मामला हो और चाहे प्रसूति अवकाश का मामला हो। स्वीकृत 16 अवकाश का मामला हो यह सब रोजगार सहायकों को दिए जाएंगे। मातृत्व अवकाश 180 दिन का तो होगा ही लेकिन 15 दिन का पितृत्व अवकाश भी दिया जाएगा। पिता को भी तो घर रहने का मौका मिले।
पंचायत सचिव की नियुक्ति में 50% रोजगार सहायकों को आरक्षण दिया जाएगा। आधी नियुक्ति फ्रेश होगी और 50% रोजगार सहायकों को चयनित किया जाएगा। अगर रोजगार सहायकों के पद खाली होंगे तो दूसरे रोजगार सहायक नियुक्त होंगे। सीएम ने कहा- भविष्य में नियुक्ति स्थानांतरण और बाकी समस्त प्रक्रियाएं पंचायत सचिवों के समान की जाएंगी। पंचायत सचिवों का भी कल्याण किया अब रोजगार सहायक के रूप में आप का भी ध्यान किया जाएगा।

कार्यक्रम में प्रदेश भर के रोजगार सहायक शामिल हुए।
मैं अगर जी रहा हूं तो मप्र के विकास और जनकल्याण के लिए
सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा मेरी एक ही तड़प है मध्य प्रदेश का विकास और जनता का कल्याण। इसी के लिए मैं जी रहा हूं। सीएम शिवराज ने कहा रोजगार सहायक मेरा क्रिएशन है। मनरेगा को व्यवस्थित करने का काम, मजदूरों का सर्वे, जॉब कार्ड बनाना हो, उपस्थिति दर्ज करना हो, मस्टररोल तैयार करना हो, ग्रामीण मजदूरों के राशन कार्ड बनाने हों यह सब काम रोजगार सहायकों के बूते पर ही हो रहा था।
आप की नियुक्ति का हमने फैसला किया कि गांव में जिसकी ग्राम पंचायत में 12वीं में सर्वाधिक नंबर होंगे। वही रोजगार सहायक होगा। योग्यता ही आधार थी। ऐसा नहीं कि किसी ने किसी को भी रख लिया जो योग्य था वह रोजगार सहायक बना। आपने कंप्यूटर भी सीखे। कंप्यूटर भी चलाए। अलग-अलग पोर्टलों का संचालन किया। एंट्री का पूरा काम किया।

रोजगार सहायकों ने फिजिकल का डिजिटल से मेल कर दिया
सूचना क्रांति के युग में किसी भी सरकारी योजना का क्रियान्वयन बिना लैपटॉप और पोर्टल के संभव नहीं है। आपने फिजिकल का डिजिटल से मेल करने का काम किया। लेकिन केवल यही काम नहीं किया। आप मनरेगा के लिए चुने गए थे लेकिन प्रधानमंत्री आवास, आयुष्मान भारत योजना, स्वच्छ भारत मिशन, संबल योजना, राष्ट्रीय परिवार सहायता, लाडली बहना योजना जिस काम के लिए कोई नहीं था उसके लिए रोजगार सहायक फिट कर दिए गए। और कोरोना के काल में भी आपने जो पलायन करके लोग आ रहे थे वह बड़ा भयानक समय था। और मैंने भी वैसा समय जिंदगी में नहीं देखा मैं जब मुख्यमंत्री बना तब कोरोना भी आ चुका था लेकिन उस समय भी ग्रामीणों की ट्रैकिंग करने का काम टैग करने का काम स्वास्थ्य विभाग के साथ कोविड की जांच करना मौत को निमंत्रण देना था लेकिन आपने प्राथमिक जांच भी की। भर्ती करवाना अलग-अलग सरकार ने शिविर लगाए थे उनका संचालन भी रोजगार सहायकों ने किया। देर है लेकिन अंधेर नहीं है सीएम ने कहा जब भी मुझे आप लोग मिलते थे तो कहते थे कि मामा जिंदगी से अनिश्चितता खत्म कर दो मैं आपके जीवन से अनिश्चितता खत्म करने आया हूं।
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