Fri. Feb 13th, 2026

[ad_1]

राजेश जैन दद्दू.इंदौरएक घंटा पहले

  • कॉपी लिंक

कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने सभी जैन संत एवं समाज से अपने वक्तव्य को लेकर क्षमा याचना की। उन्होंने कहा कि क्षमा वीरस्य भूषणम् जैनों का इतिहास रहा है। क्षमा करने में सिर्फ जैन समाज का ही एक ऐसा त्यौहार आता है, जिसमें सबसे क्षमा याचना मांगी जाती है। कहा जा रहा था कि अनिरुद्धाचार्य ने अपने प्रवचन के दौरान कुछ ऐसे शब्द का प्रयोग किया था, जिससे जैन समाज में असंतोष व्याप्त हो गया था। गुरुवार को दिल्ली में एक वीडियो में उन्होंने संत समाज से क्षमा प्रदान करने की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि यदि मेरी किसी बात से किसी को दु:ख पहुंचा हो तो मैं उसके लिए क्षमा मांगता हूं।

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *