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राजगढ़ (भोपाल)40 मिनट पहले
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राजगढ़ जिले के माचलपुर नगर में शिव महापुराण कथा का आयोजन दोपहर 2 बजे से सायं 5 बजे तक बजरंग रोड स्थित अग्रवाल धर्मशाला में किया जा रहा है। अग्रवाल समाज द्वारा श्रावण मास के अवसर पर कथा का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें प्रतिदिन आचार्य पंडित धर्मराज शास्त्री के मुखारबिंद से शिव महापुराण की कथा का श्रवण नगर व क्षेत्र के श्रद्धालुओं द्वारा किया जा रहा है।
कथा 28 जुलाई शुक्रवार से प्रारंभ हुई, जो कि 3 अगस्त तक होगी। कथा से पूर्व कई दम्पति सामूहिक रूप से प्रतिदिन प्रात: 9 बजे से पार्थिव शिवलिंग का निर्माण, पूजन व अभिषेक कर शिव की भक्ति में लीन होते नजर आ रहे हैं। दोपहर 2 बजे से सायं 5 बजे तक शिव पुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के चतुर्थ दिवस सोमवार को शिव पुराण कथा में पार्वती प्रादुर्भाव, कामदेव दहन, ज्योर्तिलिंग पूजा महिमा के बारे में पंडित धर्मराज शास्त्री ने बताया।
कथा श्रवण के बाद करते हैं पार्थिव शिवलिंग का विसर्जन*
प्रतिदिन अग्रवाल समाज के दम्पत्ति प्रात: 9 बजे कथा स्थल अग्रवाल धर्मशाला में एकत्रित होते हैं एवं पूजन उपरान्त पार्थिव शिवलिंग का निर्माण करते हैं। इसके बाद पंडित द्वारा मंत्रोच्चार के साथ पूजन, अभिषेक किया जाता है। पूजन उपरान्त सामूहिक आरती की जा रही है। इसके बाद दोपहर 2 बजे से 5 बजे तक कथा श्रवण व प्रसाद वितरण उपरान्त प्रतिदिन पार्थिव शिवलिंग का विसर्जन किया जाता है। यह क्रम आयोजन 3 अगस्त तक जारी रहेगा।

सति वियोग में शंकर भगवान की व्यथा को बताया
सोमवार को शिव पुराण में सति वियोग में भगवान शंकर की दशा के बारे में बताया। पंडित धर्मराज शास्त्री ने बताया, कि जब भगवान शिव शंकर को सति वियोग झेलना पड़ा। वियोग में भगवान शंकर की स्थित पागलों जैसी हो गई थी, उनकी मनोदशा देखकर सभी देवता ब्रह्माजी के पास पहुंचे और भगवान शंकर की पीड़ा को दूर करने के उपाय करने की बात कही। जब भी सति माता का पुर्नजन्म हो, तो उन्हें पुन: वियोग नहीं झेलना पड़े, ऐसा वचन ब्रह्मा से मांगा।
उन्होंने कहा, कि अब सति का पुर्नजन्म मां पार्वती के रूप् में होगा, अब शंकर भगवान को पुन: वियोग नहीं झेलना पड़ेगा। सति माता ने भी वरदान मांगा था, कि पुन: मुझे पति के रूप में ही भगवान शिव ही मिले। अत: कालांतर में सति माता ने पार्वती के रूप में जन्म लिया, जिनका विवाह शिव भगवान के साथ हुआ।
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