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- While Taking Selfie In The Beauty Of The Reservoir People Forget The Depth And Get Stuck In The Middle
ग्वालियर14 मिनट पहले
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तिघरा जलाश्य यह पहाड़ों से घिरा एक डैम है। यहां आए दिन लोग हादस का शिकार होते हैं, लेकिन इसकी सुंदरता देखते ही बनती है।
ग्वालियर की लाइफ लाइन तिघरा जलाश्य पहाडियों के बीच घिरा है। इसकी सुंदरता इतनी है कि देखते ही बनती है। यहां पिकनिक मनाने पहुंचने वाले लोग सुंदरता को मोबाइल में कैद करते-करते गहराई का अंदाजा लगाना भूल जाते हैं। जिस कारण वह बीच में फंस जाते हैं। डैम के किनारों पर भी बहुत गहरा है। लोग किनारे समझकर गहराई से मात खा जाते हैं। यह नदी नहीं है इसलिए यहां पानी बहता हुआ नहीं है।
यही कारण है कि पानी के अंदर बेल उग आती हैं। काई जमने से पत्थर व चट्टानों पर फिसलन उभर आती है जो हादसों का कारण बनती है। यह जलाश्य सांक नदी पर ग्वालियर से 23 किलोमीटर दूर तिघरा गांव में बना है। आसपास 35 से 40 गांव के बीच यह जलाश्य है। यहां जाने के लिए ग्वालियर के गोल पहाड़िया से तिघरा रोड सही मार्ग है, लेकिन आसपास बसे विभिन्न गांव से यहां कई रास्ते हैं जिनका उपयोग कर जाया जा सकता है।

यहां लोग काफी संख्या में बोटिंग करने भी पहुंचते हैं
यहां हर कदम पर रहता है खतरा
लगभग एक सैकड़ा से अधिक साल पुराना यह तिघरा जलाश्य में पिछले पांच साल में 17 हादसे हुए हैं जिनमें 13 जान जा चुकी हैं। यह जलाश्य काफी गहरा होने के कारण इसके अंदर कटीली और जकड़ने वाली झाड़ियां व बेल पनप जाती हैं। साथ ही किनारे पर पत्थर व चट्टानों पर फिसलन होती है। जैसे ही कोई सेल्फी या फोटो खींचने के लिए जाता है या गहने पानी में उतरता है वह डूबने निकलता है। हल्का फुल्का तेरने वाला व्यक्ति भी यहां नीचे बेलों में उलझकर फंस जाता है।
बारिश में अचानक बढ़ने लगता है पानी
तिघरा में सबसे ज्यादा हादसे बारिश के समय होते हैं। बारिश के समय में तिघरा के कैचमेंट एरिया से लगातार पानी बहकर डैम में आता है। जिन पॉइंट पर एक से डेढ़ फीट तक ही पानी होता है और लोग आराम से पिकनिक मना रहे होते हैं वहां कैचमेंट एरिया में बारिश होने पर इसी पॉइंट पर कुछ ही मिनट में चार से पांच फीट पानी बढ़ जाता है। जिससे हादसे होते हैं। कई बार लोग नहाने के लिए डैम में उतर जाते हैं, लेकिन गहराई का अंदाजा न होने पर डूब जाते हैं। नशे में तिघरा पर पहुंचने वाले ज्यादातर हादसे के शिकार होते हैं।

जलाश्य के कई भाग काफी रिस्की हैं, यहां लापरवाही पर हादसे होते हैं
पहाड़ियों के बीच में घिरा है तिघरा डैम
तिघरा जलाशय साँक नदी पर स्थित एक मीठे पानी का जलाशय है। यह ग्वालियर (मध्य प्रदेश, भारत) से 23 किमी दूर स्थित है, और शहर को मीठे पानी की आपूर्ति करने में बड़ी भूमिका निभाता है। यह तिघरा डैम चारों तरफ से पहाड़ियों से घिरा होने के कारण कटोरे जैसा नजर आता है। इसका एरियल व्यू देखने लायक होता है।
वर्ष 1914 में हुआ था तिघरा का निर्माण
तिघरा डैम का निर्माण सिंधिया स्टेट टाइम के दौारन वर्ष 1909-10 में शुरू हुआ। इसकी इंजीनियरिंग प्रसिद्ध इंजीनियर मोक्षगुंडम विश्वसरैया ने तैयार कराई थी। चार साल तक चले निर्माण कार्य के बाद वर्ष 1913-14 में तिघरा जलाशय परियोजना पूरी तरह से तैयार हो पाई थी। तिघरा गांव के निकट सांक नदी पर बनाए गए बांध का जलग्रहण क्षेत्र उस वक्त 160 वर्गमील में था। अभी तिघरा की क्षमता 740 फीट है। एक सैकड़ा साल से अधिक पुराना होने और कुछ पॉइंट पर लीकेज होने के चलते अभी तिघरा के गेट 738 फीट पर ही खोल दिए जाते हैं। तिघरा में पुराने 64 गेट हैं और नए चार गेट अलग बनाए गए हैं। यहां वनस्पतिहीन चट्टानी पहाड़ियां एवं ऊंची जमीन है, इससे पानी तेज गति से ़डेम की ओर आता है। वर्तमान में इस डेम से ग्वालियर शहर की आधी से अधिक आबादी को पानी सप्लाई किया जाता है।
हर दिन पहुंचते हैं 150 से 200 पर्यटक
तिघरा डैम पर घूमने जाने के लिए हर दिन 200 से 300 पर्यटक वहां पहुंचते हैं। यह वह अंकड़ा है जो लोग तिघरा आकर पार्किंग मंे वाहन लगाते हैं और बोट क्लब में वॉटर स्पोर्ट्स का आनंद लेते हैं, जबकि इसके अतिरिक्त कई लोग मुख्य गेट से न जाकर गांव के रास्तों पर पहुंचकर डैम में पिकनिक मनाते हैं। ज्यादातर हादसे ऐसे ही लोगों के साथ होते हैं। वीकेंड मतलब शनिवार और रविवार पर तिघर पर पर पहुंचने वाले सैलानियों की संख्या पांच सैकड़ा तक हो जाती है।
हादसों से बचने पर्यटक कैसे रहें सावधान
तिघरा डैम पर पिकनिक मनाने जाने वाले पर्यटक, सैलानी की सुरक्षा के लिए बोट क्लब पर सारे इंतजाम हैं। यहां तैराक तैनात रहते हैं। वॉटर स्पॉर्ट्स पर जाने वालों को बिना लाइफ जॉकेट के नहीं जाने दिया जाता, लेकिन जो लोग गांव के रास्ते जलाश्य पर पहुंचकर पिकनिक करते हैं उनकी सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं है। ऐसे लोगों को निम्न सावधानियां बरतनी चाहिए।
- तिघरा डैम में पिकनिक मनाते समय नशा न करें
- यदि कोई नशा करता है तो उसे जलाश्य में न उतरने दें
- जलाश्य में नहाते समय गहराई का ध्यान रखें, जलाश्य हर कदम पर गहरा होता जाता है
- पिकनिक मनाने जाते समय ट्यूब व बचाव के लिए रस्सी का इंतजाम जरुर रखें जिससे मदद मिल सके।
- हादसा होने पर तत्काल पुलिस या अन्य संबंधित विभाग को सूचना दें।
इस तरह हुए थे हादसे
- साल 2019 में रमटापुरा निवासी जीतेंद्र उर्फ जीतू(28) पुत्र बालकिशन कोष्टा अपने परिवार के साथ तिघरा बांध पर पिकनिक मनाने गए थे। जीतेंद्र उपनगर ग्वालियर में सब्जी की गुमटी लगाते थे। जीतेंद्र के बहनोई किशन अपने परिवार के साथ ऑटो से ग्वालियर स्थित अपनी ससुराल आए थे। जीतेंद्र व किशन परिवार के साथ वीकेंड पर तिघरा पहुंचे थे। जीतेंद्र तिघरा में बच्चों को नहलाने के बाद खाना खाने के लिए छोड़ गए और खुद नहाने गए तो डूब गए।
- साल 2020 में जनकगंज के निम्बाजी की खो निवासी 17 साल का कृष्णा संखवार एक दुकान पर काम करता था। वह अपने दोस्त हिमांशु, करण, जोगेन्द्र, अनूप व राज के साथ पिकनिक मनाने के लिए तिघरा गया था। यहां पर खाना खाने के बाद शाम के समय वह बोटिंग के लिए निकले और टिकट लेकर बोटिंग करने लगे। इसी बीच कृष्णा नहाने के लिए डैम के पानी में उतर गया और डुबकी लगाते ही वह डूब गया। एक दिन बाद उसकी लाश मिली।

लखनऊ से घूमने आए सैलानी शिवानी और प्रतीक
सैलानियों का क्या है कहना
- तिघरा घूमने आई शिवानी निवासी लखनऊ ने दैनिक भास्कर को बताया कि वह पहली बार तिघरा जलाश्य मंे घूमने आए थे। उनको बहुत अच्छा लगा। सुरक्षा की दृष्टि से उनका कहना है कि यहां बोट क्लब मंे तो पर्याप्त संसाधन हैं। अन्य साइड पर उन्होंने चेक नहीं किया है।
- ग्वालियर निवासी प्रतीक कुमार का कहना है कि वह तिघरा डैम पर काफी आते थे अब बाहर रहते हैं। पर आज काफी दिनों बाद आकर अच्छा लगा। सुरक्षा की दृष्टि से उन्हें लाइफ गार्ड की तैनाती अच्छी लगी, लेकिन बोट क्लब तक पहुंचने का रास्ता युवाओं के लिए ठीक है और कोई बुजुर्ग जाए तो हादसा हो सकता है।
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