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जबलपुर13 मिनट पहले
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जबलपुर में रक्षा मंत्रालय की जीआईएफ फैक्ट्री यानि ग्रे आयरन फाउंड्री को थाउजेंड पाउंडर बम की बॉडी बनाने में बड़ी कामयाबी मिली है। पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बनाया जा रहा ये बम इतना विध्वंसक है कि इसके एक हमले से दुश्मन देश की धरती थर्रा सकती है। 450 किलो वज़नी थाउजेंड पाउंडर बम के एक वार से ही पूरी की पूरी इमारत, रन वे और छोटे एयरपोर्ट को भी उड़ाया जा सकता है।

थाउजेंड पाउडर बम, ताकत इतनी कि उड़ा दे एयरपोर्ट
ये पहला मौका है जब जबलपुर की जीआईएफ फैक्ट्री में इतने बड़े बम की ढलाई स्वदेसी तकनीक और कौशल से की गई है। इंडियन एयरफोर्स ने जीआईएफ को पहली खेप में 500 थाउंजेंड पाउंडर बमों का ऑर्डर दिया गया है जिसकी बॉडी के 5 प्रोटोटाईप फैक्ट्री ने सफलता से बना लिए हैं। इन प्रोटोटाईप बमों को बारुद की फिलिंग के लिए जबलपुर में ही स्थित ऑर्डिनेंस फैक्ट्री खमरिया रवाना किया गया है। ऑर्डिनेंस फैक्ट्री खमरिया में बारुद की फिलिंग के बाद इन विध्वंसक बमो को एयरफोर्स के सुपुर्द कर दिया जाएगा। बता दें कि थाउजेंड पाउंडर बमों को एयरफोर्स के फाईटर प्लेन्स की मदद से दुश्मनों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर गिराया जाता है.. जहां ये बम गिरता है वहां दो से ढाई मीटर गहरा गड्ढ़ा हो जाता है और चारों तरफ तबाही फैल जाती है।

आयुध निर्माणी खमरिया में भरा जाएगा बम की बॉडी में बारूद
ग्रे आयरन फाउंड्री के महाप्रबंधक सुकांता सरकार ने कहा कि स्वदेशी तकनीक और कौशल से थाउजेंड पाउंडर बमों की ढलाई उनके लिए बड़ी चुनौती थी लेकिन अब सफलता के बाद फैक्ट्री को एयरफोर्स से और बड़े ऑर्डर मिलने का रास्ता साफ हो गया है। महाप्रबंधक का कहना है कि अभी 500 बमों की बॉडी बनाने का ऑर्डर मिला है, उम्मीद है कि आगे यह संख्या और भी बढ़ सकती है। प्रत्येक बम की बॉडी की कीमत करीब 3 लाख रुपए है।

थाउजेंड पाउंडर बम के विषय में जानकारी देते हुए महाप्रबंधक सुकांता सरकार
देश की सबसे छोटी फैक्ट्रियों में शुमार आयुध निर्माणी जीआईएफ का नाम बदलने के लिए मजदूर यूनियन के नेताओं ने अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा है। उन्होंने सुझाव दिया है कि ग्रेआयरन फैक्ट्री का नाम बदलकर इसे जबलपुर आयुध निर्माणी नाम दिया जाना चाहिए, जिस पर अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि यह प्रस्ताव बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा।
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