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मो. इलियास खान. इंदौरएक घंटा पहले

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मोहर्रम की 7 तारीख यानी 26 जुलाई को सरकारी ताजिया को जियारत के लिए बाहर रखा गया। ताजिया देखने के लिए हजारों की भीड़ उमड़ी और अपनी मान मन्नत के सेहरा चढ़ाया तथा तबरूक बांटा। होलकरवंश से चली आ रही परंपरा को निभाते हुए पुलिस और प्रशासन ने भी की सेहरा चढ़ाया।

सरकारी ताजिया इंतजामिया कमेटी के संरक्षक शहर काज़ी डॉ. मोहम्मद इशरत अली और अध्यक्ष हाजी इनायत हुसैन कुरैशी ने बताया कि मोहर्रम की 7 तारीख को सरकारी ताजिया को बाहर निकालकर जियारत के लिए रखा गया। पुलिस और प्रशासन की ओर से सेहरा चढ़ाकर इंदौर सहित देशभर में भाईचारे और आमनो-अमान के लिए दुआएं मांगी गईं।

सरकारी ताजिए की जियारत के लिए मोर्हरम की 7 तारीख को बड़ी संख्या में लोग इमामबाड़ा पहुंचे और सेहरा चढ़ाकर दुआएं भी मांगी गईं। मेहंदी की रात पर महिलाओं ने मेहंदी चढाकर मन्नतें मांगी। जिन लोगों की मन्नतें पूरी हुईं, उन्होंने भी मेहंदी चढ़ाकर रस्म अदा की और लोगों द्वारा आस्था व निस्बत के साथ मेहंदी की रात मनाई गई।

ताजिए पर सेहरा चढ़ाते पुलिस अफसर।

ताजिए पर सेहरा चढ़ाते पुलिस अफसर।

जियारत और मन्नतों के लिए दिनभर आवाजाही

सरकारी ताजिए की जियारत और मन्नतों के लिए दिनभर लोगों की आवाजाही चलती रही। शाम को बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और ताजिये की जियारत के लिए खासी भीड़ उमड़ी जो देर रात मक चलती रही। जायरीनों ने फातेहा पढकर इबादत की। परम्परानुसार शाम 8 बजे कलेक्टर इलैया राजा टी, पुलिस कमिश्नर मकरंद देउस्कर, ए.डी.एम. अजय देव शर्मा, एस.पी. पश्चिम इन्दौर, एडिशनल एस. पी., सरकारी ताजिया इंतेजामिया कमेटी के अध्यक्ष हाजी इनायत हुसैन कुरैशी एवं शहर काजी डॉ. इशरत अली ने सेहरा चढ़ाया और शहर की एकता और भाईचारे के लिए दुआ की। रात को जायरीनों ने श्रद्धा के साथ फातेहा पढ़ा।

इमामबाड़ा के पास सजी दुकानें।

इमामबाड़ा के पास सजी दुकानें।

मुस्लिम बस्तियों में मान-मन्नत के ताजिए दर्शन के लिए रखे बाहर

इधर , टाटपट्टी बाखल में ऐतिहासिक परचम का जुलूस निकला, जो पिंजरा बाखल, बॉम्बे बाजार होते हुए इमामबाड़ा पहुंचा और सरकारी ताजिये को सलामी दी गई। मुस्लिम बस्तियों में पानी की छबील लगाई गई, शरबत भी बांटा जा रहा है। मोर्हरम की 8 तारीख पर 27 जुलाई को शहर के सभी अखाड़े मल्ल-शस्त्र कौशल का प्रदर्शन कर राजबाड़ा होते हुए इमामबाड़ा पहुंचकर सरकारी ताजिए को सलामी देकर पुनः अपने मुकामों पर वापस पहुंच जाएंगे।

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