Sat. Apr 11th, 2026

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मुरैना5 मिनट पहले

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मुरैना कलेक्टर के पास आम जनता के लिए सप्ताह में 1 दिन का भी समय नहीं है। हर दिन तो वो व्यस्त रहते ही है, लेकिन मंगलवार को जनता उनसे अपनी समस्याओं को लेकर मिलती है, लेकिन इस मंगलवार को भी कलेक्टर साहब जनसुनवाई में मौजूद नहीं थे। जनसुनवाई में न कलेक्टर मौजूद थे, न अपर कलेक्टर और न ही नगर निगम कमिश्नर। केवल एक मात्र एसडीएम बैठे थे जो आने वाले आवेदकों से आवेदन लेकर उन्हें कलेक्टर की खाली कुर्सी के सामने मेज पर गड्डी बनाकर जमा कर रहे थे। जनसुनवाई में अन्य विभागों के अधिकारी भी मौजूद थे, लेकिन मुख्य अधिकारी न होने के कारण फरियादी भी बहुत कम पहुंचे, जिससे विभागों के अधिकारी टाइम पास करते दिखे। कुल मिलाकर जनसुनवाई के नाम पर जिला मुरैना के कलेक्ट्रेट में रस्म अदायगी चल रही है।

बता दें कि, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हर मंगलवार को जनसुनवाई का प्रावधान बनाया है, जिससे की सरकारी अधिकारी जनता से रूबरू हो सकें और जनता अपनी समस्याओं को उनके सामने रख सके तथा उनका समाधान करा सकें। लेकिन देखने में आ रहा है कि जिले के शीर्ष अधिकारियों के पास जनता के लिए सप्ताह में 1 दिन का भी समय नहीं है। जिससे जनसुनवाई अब केवल रस्म अदायगी बनती जा रही है। जब जनता अधिकारी से नहीं मिल पाती है और अपनी समस्याओं का समाधान नहीं करा पाती है, तो लोगों का सरकारी तंत्र पर से विश्वास उठता जाता है। यही हाल जिला मुरैना के कलेक्ट्रेट में चल रहा है। यहां कलेक्टर अंकित अस्थाना जनसुनवाई में ही नहीं बैठ पा रहे हैं। आम दिनों में वे, जनता से बहुत कम रूबरू हो पाते हैं, वही सप्ताह में 1 दिन जनसुनवाई में भी, वह मुरैना की जनता को समय नहीं दे पा रहे हैं। खासकर ऐसे समय में जब विधानसभा चुनाव नजदीक है और मौजूदा सरकार जनता के हित में नित्य नए फैसले कर रही है।

सरकार की छवि हो रही खराब

मुरैना में मौजूदा हालत में भाजपा के केवल दो ही विधायक हैं, बाकी पर कांग्रेस का कब्जा है। यहां तक कि महापौर व सभापति तक कांग्रेस पार्टी, यानी विपक्षी दल के हैं। आगामी विधानसभा चुनाव में समझा जा रहा है कि भाजपा की यह दोनों सीटें भी कहीं कांग्रेस के खाते में न चली जाए। इन सब के बावजूद भी जिला प्रशासन लगातार जनता की उपेक्षा कर रहा है जिससे जनता के मन में मौजूदा सरकार के खिलाफ विरोध पनप रहा है।

कम हो रही फरियादियों की संख्या

मुरैना कलेक्ट्रेट में आने वाले फरियादियों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। इसका एकमात्र कारण फरियादियों की सुनवाई न होना है। कई फरियादी तो ऐसे हैं जो सालों से जनसुनवाई में आ रहे हैं लेकिन अभी तक उनकी समस्या का समाधान नहीं किया जा सका है। उनमें ऐसे फरियादियों की संख्या अधिक मिल जाएगी जो महीनों से जनसुनवाई में आकर अपनी फरियाद का आवेदन दे जाते हैं और उसके बाद कोई कार्यवाही नहीं हुई है।

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