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जबलपुर44 मिनट पहले
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अपने ही दो बच्चों को बंदूक की नोक पर अपहरण करने के मामले में जबलपुर पुलिस ने उत्तरप्रदेश के हाथरस निवासी नायब सूबेदार और उसके दो साथियों को गिरफ्तार करने के बाद पूछताछ के लिए रिमांड में लिया गया था। पुलिस को आरोपियों के पास से पिस्टल नही मिली है, लिहाजा साक्ष्य छिपाने की पुलिस ने धाराएं बढ़ाते हुए कोर्ट में पेश करने के बाद बुधवार को जेल भेजा दिया गया। पुलिस रिमांड के दौरान आरोपियों से अपहरण करने में उपयोग की गई बंदूक की पतासाजी करने की कोशिश की पर वह अभी तक नही मिली। बच्चों को अपहरण करने में पिता सतपाल सहित पांच लोग शामिल थे जिसमें पुलिस ने तीन को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक की मौत हो गई है, तो वही एक फरार है।

आरोपी सतपाल अपने बच्चों और पत्नी के साथ
जबलपुर पुलिस ने पांच दिनों की कड़ी मेहनत के बाद उत्तरप्रदेश पुलिस की मदद से निकिता और अनिकेत का बंदूक की नोक पर अपहरण करने के आरोप में नायब सूबेदार सतपाल उसके साथी विपिन और लवकेश को मथुरा से गिरफ्तार किया और दोनों बच्चों को सकुशल जबलपुर लेकर आए। पुलिस पूछताछ में आरोपी सतपाल ने बताया कि वह अपने बच्चों को पाने के लिए कई माह से परेशान था, उसे पता था कि उसकी पत्नी भाग्यश्री आसानी से बच्चों को नही देगी, इसलिए उसने बच्चों की किडनैपिंग का प्लान बनाया। सतपाल ने अपने छोटे भाई धर्मपाल जो कि गांव में ही रहकर किसानी करता है, उसे भी शामिल किया। इसके बाद हाथरस में ही रहने वाले ट्रेवल्स संचालक प्रशांत से झूठ बोलकर उसे और विपिन, लवकेश को जबलपुर लाया।
सतपाल ने प्रशांत को बताया कि इन दिनों एमपी में एलेक्शन चल रहें है, जहां पर कि ट्रेवल्स का अच्छा काम है। यहां पर गाड़ियां लग रहीं है, जहां अच्छा पैसा भी मिलता है। सतपाल की बातें मानकर प्रशांत ने मध्यप्रदेश का काम समझने के लिए दो ड्राइवर विपिन और लवकेश को भी साथ में रख लिया। सतपाल ने प्रशांत से कहा कि अपने साथ पिस्टल भी रख लों क्योंकि वहां थोड़ा खतरा भी हो सकता है। प्रशांत ने यूपी में दो पिस्टल का इंतजाम किया और फिर एमपी आ गए। सतपाल अपने छोटे भाई के साथ प्रशांत, विपिन और लवकेश को लेकर 11 जुलाई की सुबह जबलपुर आया और पूरा प्लान सभी को बताया। प्रशांत ने अपहरण के प्लान में शामिल होने से मना कर दिया, जिस पर सतपाल ने उसे अच्छा पैसा देने का लालच दिया। 11 जुलाई को जबलपुर आने के बाद पांचों शहर की एक होटल में रुके। 12 जुलाई को बिलहरी के आसपास घूमे। 13 जुलाई को सभी लोग बरगी गए और फिर उसी दिन रात को अनिकेत और निकिता को उनके घर के बाहर से उठा लें गए।

उत्तरप्रदेश हाथरस पहुंचते ही प्रशांत, विपिन और लवकेश अपने-अपने घर चले गए। सतपाल और धर्मपाल दोनों बच्चों को अपने साथ हाथरस में रखें और फिर बाद में उन्हें मौसी की बेटी के घर मथुरा लें गए। इधर इस अपहरणकांड से प्रशांत बहुत परेशान था। उसे डर था कि इस केस में शामिल होकर वह फंस गया है। बच्चों की किडनैपिंग केस में जो दो पिस्टल उपलब्ध करवाई थी, वह प्रशांत ने ही दिलवाई थी। उसे डर था कि अगर पुलिस ने पकड़ा तो वही इसका मास्टरमाइंड बनेगा, इतना ही नही परिवार में, समाज में बेइज्जती भी होगी, इसी से परेशान होकर प्रशांत ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में सतपाल, विपिन और लवकेश ने बताया कि अपहरण में उपयोग की गई पिस्टल उन्होंने जबलपुर से करीब 100 किलोमीटर दूर जंगल में फैंकी थी। रात होंने के कारण यह पता नही है स्थान कौन सा है। गोराबाजार थाना पुलिस ने पिस्टल तलाश किया पर वह नही मिली। पुलिस ने तीनों ही आरोपियों को कोर्ट में पेश किया जहां से उन्हें जेल भेजा जाएगा। पुलिस अब धर्मपाल की गिरफ्तारी के लिए जल्द ही फिर से उत्तरप्रदेश हाथरस जाएगी। फिलहाल दोनों बच्चे अभी अपनी मां के पास है।
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