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- Husband Is Suffering From Cervical Pain, The Couple Said After Mother’s Death, Now Get Compassionate Appointment
छतरपुर (मध्य प्रदेश)4 मिनट पहले
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इन दिनों में देश में SDM ज्योति मोर्या की चर्चा चल रही है। पहले उसे पति ने पढ़ाई में मदद की। लेकिन SDM बनने के बाद उसने पति को छोड़ दिया था। इधर, MP के छतरपुर में एक महिला अपने पति की बामारी को ठीक कराने के लिए उसे गोद में उठाकर सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रही हैं। मामला छतरपुर के लवकुशनगर के परसानिया गांव का है।
छतरपुर जिले के लवकुश नगर क्षेत्र के परसानिया गांव में रहने वाले अंशुल गौड़ (30) की शादी 6 साल पहले साल 2017 में प्रियंका गौड़ (23) से हुई थी। शादी के एक साल बाद ही अंशुल एक्सीडेंट का शिकार हो गया। उसके पैर और कमर में गंभीर चोटें आई थीं, तभी से वह चल-फिर नहीं कर पा रहा है। अंशुल को सर्वाइकल पेन (लकवा) की बीमारी हो गई। तभी से पत्नी अपने दिव्यांग पति कोई लेकर जिम्मेदारों की चौखट पर मदद की गुहार लगाने पहुंच रही है। आर्थिक तंगी से परेशान प्रियंका अपने पति के इलाज और मां के स्थान पर उसे अनुकंपा नियुक्ति दिलाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं। लेकिन अब तक उसे कही से मदद की मिली है।

जनसुनवाई में गोद में लेकर पहुंची..
मंगलवार को एक बार फिर प्रियंका कलेक्टर की जनसुनवाई में पति को गोद में लेकर पहुंची। यहां उसे कलेक्टर ने मदद का आश्वासन दिया है।
5-6 साल से परेशान है दंपति
पति-पत्नी का कहना है कि वह पिछले 5-6 सालों से परेशान हैं। छतरपुर जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से कई बार मदद मांग चुके हैं लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। प्रिंयका गौर का कहना है कि मैं पति को अनुकंपना नियुक्ति और इलाज के लिए करीब 5 साल से गोद में लेकर शासकीय कार्यालयों में भटक रही हूं। पति को शादी के एक साल बाद ही सर्वाइकल पेन हो गया था। उसके बाद से ही मैं पति को उनकी मां के स्थान पर अनुकंपा नियुक्ति मिल जाए इसके लिए दर-दर भटक रही हूं। मैं वीडी शर्मा से मिलने गई। सीएम आवास तक गई लेकिन मेरी समस्या का निराकरण नहीं हुआ। आज जनसुनवाई में कलेक्टर से मिलने आई। साहब बोले आपकी मां अध्यापक के पद थी आपके पति की योग्यता अध्यापक के स्तर की नहीं है, इसलिए अनुकंपा नियुक्ति नहीं मिल सकती है। मेरे पति विकलांग है मैं कैसे उन्हें डीएड-बीएड कराऊं। मैं बीए पास हूं लेकिन मुझे नियुक्ति नहीं मिल सकती है। इतना ही नहीं वह क्षेत्रीय सांसद और BJP प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा से मिल चुकी है। वह भोपाल पति को ले जाकर CM हाउस में CM से मिलने पहुंची थी लेकिन 1 सप्ताह के इंतज़ार के बाद भी CM से नहीं मिल सके।

अंशुल गौड़ सड़क हादसे के बाद सरवाईकल पेन की बामारी से ग्रस्त है। उसकी पत्नी प्रियंका उसे सरकारी दफ्तरों में ले जाकर इलाज के लिए गुहार लगा रही है। इसके साथ ही अंशुल अपनी मां की मौत के बाद उनके स्थान पर अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग कर रहा है।
लाखों रुपए का कर्ज हो गया
आर्थिक तंगी से परेशान गंभीर परिस्थिति में प्रियंका जैसे-तैसे जेवर बेचकर 1 लाख 30 हजार रुपए लेकर कानपुर पहुंची। जहां न्यूरोन हॉस्पिटल में पति अंशुल का इलाज करा रही थीं। वहां 1 माह 10 दिन भर्ती रहने के दौरान उनका सारा पैसा खर्च हो गया, और अब पैसा न हो पाने के कारण 9 जुलाई को वह छतरपुर अपने गांव वापस आ गई। प्रियंका और उनके पति का कहना हैं कि उन पर लोगों का 3 लाख से अधिक का कर्ज हो गया है। जिसे पटा पाना मुश्किल हो रहा है। ऊपर से इलाज के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं।
मैं ज्योति मौर्या नहीं, जो पति को छोड़ दूं, जिंदगी भर साथ निभाऊंगी
प्रिंयका गौर ने कहा कि मैं ज्योति मौर्या के जैसे नहीं हूं जो SDM बनने के बाद अपने पति को ही छोड़ दूं। मैं आखिरी दम तक पति का साथ दूंगी। उनका इलाज करवाऊंगी। मेरे लिए वो ही सब कुछ है। शादी को 6 साल हो गए है। शादी के एक साल बाद पति का एक्सीडेंट हो गया। इसमें उन्हें सरवाइकल पेन हो गया। तब से भटक रही हूं। कर्ज लेकर गुजर-बसर कर रही हूं। मेरे ऊपर साढ़े 3 लाख रुपए को कर्ज हो गया है। मैंने कलेक्टर साहब को आवेदन दिया है कि मेरे पति का इलाज कराएं। मैं इलाज कराने लायक नहीं बची हूं। कलेक्टर ने कहा कि इंतजार करिए।
पति की सरवाईकल स्पेन की बामारी के लिए हर महीने की दवा 8-10 हजार रुपए में पड़ती है। मुझे 5-6 साल इलाज कराते-कराते हो गया। इसलिए कलेक्टर साहब से इलाज के लिए मदद की गुहार लगा रहे है और मां के स्थान पर अनुकंपा नियुक्ति भी दे दीजिए। हमारी आर्थिक स्थिति बहुत खराब है। अनुकंपा नियुक्ति मिल जाए तो परिवार को भरण-पोषण चलता रहेगा।
दिव्यांग अंशुल को चाहिए अनुंकपा नियुक्ति
अंशुल ने कहा कि उसकी मां की मौत साल 2015 में एक दुर्घटना में हो गई थी। उसकी मां विकासखंड गौरिहार के ग्राम कितपुरा में शासकीय हाईस्कूल में अध्यापक के पद पर पदस्थ थीं। उनकी आगजनी में मौत हो गई थी। अब वह उनकी अनुकंपा नियुक्ति की मांग करता फिर रहा है। जिसकी आज उसने जनसुनवाई में कलेक्टर से गुहार लगाई है।
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