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ओजस पालीवाल. इंदौर10 मिनट पहले

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पीथमपुर बायपास रोड पर दिलीप नगर​​ स्थित मां बंगलामुखी सिद्धपीठ शंकराचार्य मठ में चल रहे नित्य प्रवचन में मठ के अधिष्ठाता ब्रह्मचारी डॉ. गिरीशानंद महाराज के प्रवचन जारी हैं। प्रवचन में रविवार को महाराजश्री ने कहा- हमारी भारतीय परंपरा में प्राचीन काल से भोजन करने के बर्तन धातु के बने होते थे, जिसमें भोजन करने से शरीर में जो धातुएं कम हो जाती है, उनकी पूर्ति हो जाती थी। धातु व्यक्ति को बलवान बनाती है पांच धातु पूजा में भी उपयोग की जाती हैं।

पांच धातुओं का जीवन में बहुत महत्व

महाराजश्री ने कहा ये धातुएं सोना, चांदी, पीतल, तांबा, कांसा है। आजकल स्टील, एलुमिनियम और प्लास्टिक आदि के बर्तनों का उपयोग खाना परोसने में होता है। एल्युमीनियम के बर्तन से बुद्धि कमजोर होती है, कैंसर होने की आशंका रहती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती हैं। इसके कारण व्यक्ति के शरीर में धातु नहीं जा पाती और वह बलहीन हो जाता है। शरीर में कई प्रकार के रोग उत्पन्न हो जाते हैं। आज की आधुनिक चकाचौंध में आम आदमी को यह बात समझ नहीं आती है, जिसके कारण उनका समूचा जीवन दवाइयों में गुजरता है। परिणाम यह होता है कि वे जिस सुख के लिए दिन-रात मेहनत कर कमाई करते हैं, उसका उपभोग का समय आते-आते उनकी जिंदगी समाप्त हो जाती है। हमें चाहिए कि हम अपनी प्राचीन पद्धति को अपनाएं और सुखी-समृद्ध जीवन जिएं।

पित्त कुपित होने से बीमार पड़ता है व्यक्ति

डॉ. गिरीशानंद महाराज ने बताया सोना और चांदी धातु से बल बढ़ता है। पीतल से पित्त कुपित नहीं होता, पित्त के कुपित होने से ही व्यक्ति बीमार पड़ता है। शास्त्रों ने कहा है वीर भोग्यं वसुंधरा। वसुंधरा का सुख बलवान व्यक्ति ही भोग सकता है कमजोर नहीं।

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