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जबलपुरएक घंटा पहले
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आबकारी विभाग के सख्त निर्देशों के बाद भी शराब ठेकेदार अधिक रेट पर शराब बेचने से बाज नही आ रहें है। लगातार मिल रही शिकायतों के चलते आबकारी विभाग ने एक बार फिर कई दुकानों में जांच की, जहां पाया कि दुकानों में अधिक दामों में शराब बेचकर ग्राहकों से अधिक राशि ली जा रही है, लिहाजा आबकारी विभाग ने एमआरपी से अधिक दाम पर शराब बेचने के चलते शहर की 8 शराब दुकानों पर कार्रवाही करते हुए प्रकरण दर्ज किए है, जल्द ही कलेक्टर न्यायालय के समक्ष मामले को रखा जाएगा।

आबकारी विभाग की कार्यवाही से ठेकेदारों में मचा हड़कंप
शराब ठेकेदार सिंडिकेट बनाकर एक दाम पर तो शराब बेच ही रहें है, इतना ही नही अधिक दामों में भी शराब बेचने की शिकायत आबकारी विभाग तक पहुंच रही थी। जानकारी के मुताबिक शहर की कई शराब दुकानों में एमआरपी से ज्यादा रेट पर शराब बेचने की शिकायत पर आबकारी विभाग के अमले ने एक साथ कई दुकानों में औचक कार्रवाही करते हुए स्टाक और लेजर का मिलान किया। आबकारी विभाग ने जांच में पाया कि शहर की आठ दुकानों में एमआरपी से अधिक, याने 5 रुपए से लेकर 20 रुपए तक अधिक वसूले जा रहें है, जांच के दौरान विभाग ने शराब दुकान ठेकेदारों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। आबकारी कंट्रोलर जी.एल मरावी ने बताया कि शराब दुकान संचालको ने शराब सिंडिकेट बनाकर अधिक लाभ कमाने को लेकर शासन द्वारा निर्धारित किए गए रेट से अधिक दामों पर शराब बेच रहें थे। ग्राहकों से लगातार मिल रही शिकायत के बाद विभाग ने आठ दुकानों के खिलाफ कार्रवाही की है।
एक्साइज असिस्टेंट कमिश्नर रविंद्र मानिकपुरी के निर्देश पर कन्ट्रोलर जीएल मरावी के नेतृत्व में एक दर्जन से अधिक टीमें बनाई गई। अचानक से शराब दुकानों में पहुंची टीम के द्वारा टैक्स पर्चेसिंग करवाई गई तो शराब दुकान रांझी, शराब दुकान बिलहरी, शराब दुकान घाना, शराब दुकान पिपरिया, शराब दुकान ओमती, शराब दुकान अधारताल, शराब दुकान कंचनपुर और शराब दुकान माढ़ोताल में एमआरपी से अधिक दाम पर शराब खरीदने वालों को बेची जा रही थी, जिस पर से आबकारी विभाग ने 8 दुकानों पर प्रकरण दर्ज करते हुए विवेचना में लिया है, जल्द ही प्रकरणों को कलेक्टर न्यायालय में पेश किया जाएगा, और मांग की जाएगी कि दुकानों का लाइसेंस निलंबित किया जाए।

अधिक दाम पर शराब बेचने पर 8 दुकानों के खिलाफ प्रकरण किए गए दर्ज
एमआरपी से अधिक दामों पर शराब बेचने वालों के खिलाफ आबकारी विभाग ने एक माह पहले भी कार्रवाही की थी। आबकारी विभाग ने महंगी शराब बेचने वाली शहरी क्षेत्र की दस दुकानों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए इनके एक दिन के लायसेंस निलंबित किए थे। शिकायत के बाद आबकारी विभाग के द्वारा गणेश चौक, ककरतलैया, मदन महल, मीरगंज, मानेगांव, मोटर स्टैंड (एक), बल्देवबाग, विजय नगर, भानतलैया और घाना स्थित शराब दुकानों की जांच की गई थी, जांच में इन सभी दुकानों में गड़बड़ी पाई गई, जिस पर लाइसेंसी शराब ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई करने के नोटिस दिए गए थे।
जबलपुर में शराब ठेकेदारों ने माफिया की भांति सिंडिकेट बना लिया है, सभी ठेकेदारों की शराब दुकानों का संचालन सिंडिकेट द्वारा किया जा रहा है। सिंडिकेट में ही शराब दुकानों में मुनाफाखोरी शुरू की है, लगातार एमआरपी से ज्यादा दाम पर शराब बेचने की शिकायत आबकारी विभाग महज खानापूर्ति की कार्रवाही कर रहा है, यही कारण है कि शराब सिंडिकेट माफिया को कोई फर्क नही पड़ रहा है।

शराब दुकानों पर कार्रवाई करते हुए आबकारी विभाग
जबलपुर की शराब दुकानों से मंहगी शराब बेचने के मामले में जब आबकारी विभाग की कार्रवाही ढीली पड़ी तो फिर EOW को इसमें आना पड़ा। करीब एक माह पहले ग्राहक बनकर शराब खरीदने पहुंचे EOW के अधिकारियों ने जबलपुर के पांच ठेकेदारों के खिलाफ धोखाधड़ी व साजिश रचने प्रकरण दर्ज किया था। जबलपुर में पांच शराब ठेकेदारों ने अपना सिंडिकेट बना लिया. जिसके चलते इन ठेकेदारों की दुकानों से निर्धारित मूल्य से अधिक दाम पर शराब बेचने का काम शुरु हो गया। लम्बे समय से सिंडिकेट बनाकर मंहगी शराब बेचे जाने की शिकायत ईओडब्ल्यू तक जब पहुंची तो जांच करते हुए पांच ठेकेदारों के खिलाफ धारा 120बी, 420 का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया।
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