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इंदौरएक घंटा पहले
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बीकॉम फर्स्ट ईयर एक्जाम 10 मई से स्टार्ट हुई है, उसमें 12 मई को Business Regulatory Frame Work और 15 मई को Business Organization Communication का पेपर था। ये दोनों पेपर एक्जाम के एक दिन पहले वॉट्सऐप पर पाए गए यानी 11 और 14 मई को पेपर लीक हो गए ऐसी हमारे पास इन्फॉर्मेशन आई थी।
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने विभाग स्तर की कमेटी से इसकी जांच करवाई। उसमें हमें शक हुआ कि ये हो सकता है। इसके बाद हमने पुलिस-प्रशासन को इन्फॉर्म किया। उन्होंने भी अपने स्तर पर जांच के बाद अब मामले में एफआईआर दर्ज की है।
इसमें कौन इन्वॉल्व है, ये जांच का विषय है और जांच के बाद ही पता चलेगा कि इसके पीछे कौन है। पेपर लीक होने के बाद यूनिवर्सिटी को पेपर रद्द करना पड़ा। पुन: पेपर कराना पड़ेगा। आर्थिक नुकसान हुआ है, यूनिवर्सिटी की गुडविल भी खराब हुई है। इसलिए एफआईआर करवाई गई है।
ये कहना है यूनिवर्सिटी के छात्र कल्याण विभाग के संकायाध्यक्ष डॉ.एलके त्रिपाठी का। डॉ.त्रिपाठी ने पेपर लीक के संबंध में यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार अजय वर्मा का आवेदन क्राइम ब्रांच में दिया था, जिसके आधार पर मामले में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ क्राइम ब्रांच ने धारा 406 और मध्यप्रदेश मान्यता प्राप्त परीक्षाएं अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया है।

यूनिवर्सिटी के छात्र कल्याण विभाग के संकायाध्यक्ष डॉ.एलके त्रिपाठी।
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने क्राइम ब्रांच को दिए आवेदन में लिखा कि विश्वविद्यालय की स्नातक स्तर की परीक्षाएं 10 मई 2023 से शुरू की गई। इल्वा कॉलेज के प्रिंसिपल ने बताया कि एक्जाम के पेपर लीक हुए हैं। मोबाईल नंबर 87691##### (जो की बीकाम प्रथम वर्ष का छात्र है) बीकाम प्रथम वर्ष NEP का 12 मई को होने वाला पेपर (Business Regulatory Frame Work 2) एक दिन पहले 11 मई को और 15 मई का पेपर (Business Organization Communication) 14 मई को मोबाइल पर लीक हुआ है।
यह आशंका है कि यह पेपर इन्हें किसी ओर से प्राप्त हुए हैं। जिससे यूनिवर्सिटी के एग्जाम पेपर की गोपनीयता भंग की गई है और यूनिवर्सिटी की छवि भी धूमिल की गई है। इस कारण से यूनिवर्सिटी द्वारा उक्त दोनों प्रश्नपत्र निरस्त करते हुए फिर परीक्षा से आयोजित की जा रही है, जिससे विश्वविद्यालय को आर्थिक हानि पहुंची है साथ ही अन्य स्टूडेंट्स को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ा है।
बता दें एक्जाम के लिए यूनिवर्सिटी द्वारा कॉलेजों को परीक्षा केंद्र बनाया जाता है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने 8 जिलों के परीक्षा केंद्र बने कॉलेजों को एक्जाम के पेपर भेजे थे, पेपर कहां से लीक हुआ इसकी जांच अब पुलिस ने शुरू कर दी है। कौन गिरोह इसके पीछे काम कर रहा है।
मोबाइल नंबर के आधार पर क्राइम ब्रांच आरोपी तक पहुंचने की कोशिश में लगी है। संभाग के दस-बारह हजार स्टूडेंट्स बीकॉम की परीक्षा में शामिल हुए। पेपर रद्द होने की वजह से सभी स्टूडेंट्स को भी परेशानी उठानी पड़ी है।

सोशल मीडिया पर यूनिवर्सिटी की एक्जाम का पेपर लीक हुआ है।
परीक्षा के पहले थाने से लाए जाते हैं पेपर
एग्जाम के पेपर यूनिवर्सिटी की प्रेस में छपते हैं। फिर इन्हें कर्मचारी परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाते हैं, लेकिन उसके पहले इन्हें नजदीकी थाने पर सुरक्षित रखा जाता है। एग्जाम शुरू होने के घंटे भर पहले परीक्षा केंद्राध्यक्ष इन्हें थाने से लाते हैं। ऐसे में इस प्रक्रिया में शामिल सभी लोग भी संदेह के घेरे में हैं। सवाल यही है कि चूक कहां हुई और किसने पेपर लीक कर दिया। परीक्षा केंद्रों से यूनिवर्सिटी प्रशासन पेपर खोलते समय का वीडियो भी मांग चुका है। पिछले दिनों यूनिवर्सिटी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया था, जिसमें पेपर लीक मामला भी शामिल है।

आरएनटी मार्ग स्थित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय का प्रशासनिक कैंपस।
1990 में भी हो चुका है लीक
देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी में करीब 30 साल के बाद पेपर लीक होने का मामला सामने आने की बात कही जा रही है। अफवाहें उड़ती रही लेकिन कोई सबूत सामने नहीं आए। परीक्षा बिना किसी विवाद के संपन्न हुई। बताया जाता है कि इससे पहले साल 1990 में बीकॉम फाइनल ईयर का पेपर लीक होने का मामला सामने आया था। तब यूनिवर्सिटी की प्रेस में काम करने वाला कर्मचारी ही धराया था। उसने घर में एक पेटी में पेपर रख उसे जमीन के नीचे गाड़ दिया था। एग्जाम के सारे पेपर उसके पास मिले थे। वो प्रिंटिंग प्रेस से ही चोरी-छुपे अपने साथ एग्जाम के पेपर घर ले जाता था।
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