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  • The Theme Song Of Emotional Connect From MP Is Ready; Listen For The First Time How ‘Modi In MP’s Mind’ Will Settle

भोपाल17 मिनट पहलेलेखक: योगेश पाण्डे

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मध्यप्रदेश भाजपा में चुनावी चेहरे को लेकर बना सस्पेंस खत्म हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर ही बीजेपी एमपी के चुनावी मैदान में उतरेगी। पार्टी ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है। मोदी के मन में बसे एमपी, एमपी के मन में मोदी… थीम पर कई वीडियो गीत बनकर तैयार हैं। इन गानों में उनका पूरा एमपी कनेक्शन बताया गया है। राज्य के साथ केंद्र सरकार की स्कीमों को शामिल कर उनके चेहरे को ही हाइलाइट किया गया है।

चुनाव से पहले इन तीन महीनों में मोदी के एमपी कनेक्शन की ब्रांडिंग की जाएगी। इसमें बताया जाएगा कि उनका एमपी से कितना पुराना कनेक्शन रहा है? उन्हें एमपी की कितनी चिंता की है? अगले कुछ दिनों में आधिकारिक तौर पर पार्टी ये थीम सॉन्ग रिलीज कर देगी।

दैनिक भास्कर के पास मोदी को एमपी में ब्रांड करने वाले वो तमाम वीडियो सॉन्ग हैं, जो इस बात की तस्दीक करते हैं कि वे ही एमपी में पार्टी का चेहरा बन रहे हैं।

बड़ा सवाल ये है कि मोदी एमपी के लोगों से इमोशनली कनेक्ट हो पाएंगे?

इसके लिए पार्टी के रणनीतिकारों ने पूरा एक्शन प्लान बनाया है। इसका एक ही एजेंडा है कि चुनाव से पहले एमपी के मन में मोदी को स्थापित किया जाए, ताकि लोगों का राज्य सरकार के खिलाफ गुस्सा कम हो सके। माना जा रहा है कि वे मध्यप्रदेश में पार्टी का सबसे मुख्य चेहरा होंगे तो सत्ता और संगठन के चेहरे को लेकर उठ रहे सवाल अपने आप दब जाएंगे।

सबसे पहले जानिए- एमपी के मन में कैसे लॉन्च होंगे मोदी

भाजपा के रणनीतिकारों ने दो महीने पहले से इस पर काम शुरू कर दिया था। दैनिक भास्कर के पास इसके एक्सक्लूसिव वीडियो हैं, जो एमपी में मोदी के लॉन्चिंग प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं।

  1. महाकाल लोक का लोकार्पण भोले बाबा के मन भाया, मोदी जैसा भक्त है आया… इस थीम पर ये वीडियो सॉन्ग बनकर तैयार है। इसमें मोदी को महाकाल का भक्त बताते हुए महाकाल लोक के लोकार्पण के वीडियो दिखाए गए हैं। इससे पीछे उद्देश्य लोगों को ये समझाना है कि मोदी का एमपी के प्रति विशेष लगाव है।
  2. युवा को नॉलेज, नए मेडिकल कॉलेज दूसरे गाने की थीम है युवा को मिल रही शिक्षा और नॉलेज.. नए खुल रहे मेडिकल कॉलेज..। सीखो और कमाओ योजना… का भी जिक्र है। इसमें ये भी जिक्र है कि परदेस यानी विदेशों में अब भारत का माइलेज बढ़ गया है। नल-जल, एक्सप्रेस वे और विकास योजनाओं की बात भी इसमें है।
  3. जनजाति मुख्य धारा में, घर-घर राशन जनजाति क्षेत्रों के लिए जो गाना तैयार हुआ है उसमें जिक्र है कि जनजाति मुख्य धारा में आया, घर-घर राशन पहुंचाया। मजदूरों को संबल बनाने और किसानों का सम्मान बढ़ाने का जिक्र इस गाने में है। खेतों तक पानी पहुंचाने और सस्ते खाद पानी का जिक्र है।
  4. भारत का दिल है एमपी… चौथे थीम सॉन्ग में बताया है कि भारत का दिल है एमपी, बात बताएं इसकी… इसी थीम पर इस गाने को रिकॉर्ड किया गया है।

ऐसे समझिए…जहां 17 साल से भाजपा सरकार, वहां मोदी चेहरा क्यों

दरअसल, मध्यप्रदेश में 17 सालों से भाजपा सरकार है। ऐसे में सरकार के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी का जोखिम है। बीते दिनों हुए कुछ सर्वे में मध्यप्रदेश में सरकार के खिलाफ नाराजगी का पता चला है। ऐसे में बीते कई दिनों से मध्यप्रदेश में सत्ता और संगठन में फेरबदल की सुगबुगाहट भी चलती रही है।

बीते दिनों 4 राज्यों में तो पार्टी ने नए प्रदेश अध्यक्ष बनाए, लेकिन एमपी में कोई फेरबदल नहीं किया है। यहां पुराने चेहरों को जस का तस रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चेहरा सामने लाया जा रहा है, ताकि लंबे अरसे से सरकार के साइड इफैक्ट का असर कम से कम हो पाए।

पार्टी ने यहां चुनाव प्रभारी के तौर पर पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को और सह प्रभारी के तौर पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को भेजा है। दोनों ही मोदी के करीबी माने जाते हैं।

फायदा नंबर 1 : मोदी के नाम पर एकजुट रहेगी भाजपा

मध्यप्रदेश में तीन टुकड़ों (शिवराज भाजपा, नाराज भाजपा और महाराज भाजपा) में बंटी पार्टी क्षत्रप मोदी नाम की छतरी के नीचे एकजुट होकर रहेंगे। दूसरा इससे ये मैसेज भी जाएगा कि मध्यप्रदेश चुनाव की रणनीति दिल्ली से ही तय होगी। टिकट वितरण के ज्यादातर फैसले भी केंद्र में बैठकर मोदी खुद करेंगे।

फायदा नंबर 2 : 100 से ज्यादा टिकट कटेंगे तो उठापटक भी कंट्रोल में रहेगी

भाजपा की रणनीति के मुताबिक एंटी इनकम्बेंसी की काट के लिए कम से कम 100 नए चेहरे लाए जाएंगे। जब नए चेहरों को टिकट मिलेगा तो जाहिर है कि पुराने चेहरों के भीतरघात करने का जोखिम ज्यादा होगा। मोदी चुनाव अभियान को संभालेंगे तो भीतरघात को कंट्रोल करना आसान होगा।

पार्टी के रणनीतिकारों को इस बात का अहसास है कि एंटी इन्कम्बेंसी की काट के लिए यहां 100 से ज्यादा टिकट काटने पड़ेंगे। ऐसे में पार्टी के भीतर उठापटक भी होगी, लेकिन मोदी की अगुवाई में इसे कंट्रोल करना आसान होगा।

फायदा नंबर 3 : मंत्रियों के बीच खींचतान थमेगी, विद्रोह नहीं कर पाएंगे

रणनीतिकारों का ये मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे का फायदा मंत्रियों के बीच चल रही खींचतान रोकने में भी कारगर होगा। वर्तमान में मध्यप्रदेश में चंबल और बुंदेलखंड में मंत्री एक-दूसरे के खिलाफ काम कर रहे हैं। ये शिकायतें केंद्र तक भी पहुंची हैं।

रणनीतिकारों का ये मानना है कि सरकार के मंत्रियों का ये सत्ता संघर्ष भाजपा को मुश्किल में डाल रहा है। मोदी चेहरा होंगे तो आपस का ये सत्ता संघर्ष काफी हद तक दबा हुआ रहेगा।

फायदा नंबर 4 : सिंधिया गुट को कंट्रोल रखना आसान होगा

मध्यप्रदेश में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ आए नेताओं की महत्वाकांक्षा भी बढ़ती जा रही है। भाजपा के इंटरनल सर्वे में सिंधिया गुट के मंत्री विधायकों की रिपोर्ट जिताऊ नहीं है। ऐसे में साफ है कि सत्ता हासिल करने के लिए ज्यादातर चेहरे बदलने का फैसला लेना पड़ सकता है।

ऐसे में पार्टी के भीतर का पूरा ईको सिस्टम गड़बड़ा जाएगा। ऐसे में इस ईको सिस्टम को मेंटेन रखने में भी मोदी का चेहरा कारगर होगा।

प्रारंभिक रिपोर्ट में ये भी पता चला है कि सिंधिया गुट के साथ आए विधायकों की परफार्मेंस रिपोर्ट ठीक नहीं है। ऐसे में इनके टिकट काटने पड़ सकते हैं। मोदी की लीडरशिप में विद्रोह कर पाना मुश्किल होगा। सिंधिया को अपने लोगों को चुप कराना पड़ेगा।

शहडोल में ही लॉन्च होना था ‘एमपी के मन में मोदी’

भाजपा के रणनीतिकारों की तैयारी थी एमपी इलेक्शन के लिए ब्रांड मोदी की लॉन्चिंग शहडोल में की जाए, लेकिन आखिरी मौके पर इसे रोका गया। भाजपा चाहती थी कि इससे पहले मोदी के लिए एमपी भाजपा में उनके मनमाफिक टीम बन जाए, जो उन्हें उनके तौर तरीकों के हिसाब से रिपोर्ट कर सके।

यही वजह है कि मोदी के पंसदीदा भूपेंद्र यादव व अश्विनी वैष्णव को मध्यप्रदेश भाजपा का प्रभारी और सह प्रभारी बनाया गया है। मोदी मध्यप्रदेश की स्ट्रैटेजी के लिए सीधे तौर पर इन दोनों नेताओं से बात करेंगे। यानी मध्यप्रदेश में चुनाव का पूरा काम मोदी के वर्किंग कल्चर के हिसाब से होगा। यहां किसी नेता का टिकट में कोई कोटा नहीं चलेगा।

मई में ही बन गया था ट्विटर हैंडल, लेकिन होल्ड होने के कारण हाईलाइट नहीं किया

एमपी के मन में मोदी… प्रोजेक्ट देख रही टीम ने इसे शहडोल में लॉन्च करने की पूरी तैयारी कर ली थी। सोशल मीडिया नेटवर्क पेज बनाने का काम भी हो चुका था। यहां तक कि इसका ट्विटर हैंडल तो मई में जारी हो चुका है। इस प्रोजेक्ट को होल्ड किया गया था।

इसे ऐसे समझ सकते हैं कि इस ट्विटर हैंडल को प्रधानमंत्री मोदी भी फॉलो करते हैं, लेकिन इसके फॉलोअर की संख्या खबर लिखे जाने तक केवल चार है, जबकि ये मई से पब्लिक डोमेन में है।

इससे समझा जा सकता है कि सही समय पर लॉन्च करने के लिए इसे होल्ड किया गया और प्रचार से बिलकुल दूर रखा गया है, जबकि मई से अब तक रोज इस पर एमपी के मन मोदी…थीम पर कुछ न कुछ कंटेंट डाला जा रहा है, लेकिन इसे भाजपा प्रचारित नहीं कर रही है, क्योंकि वो सही समय का इंतजार कर रही है।

अमित शाह का एमपी की रणनीति संभालना भी इसी बात का संकेत

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का दो दिन पहले मध्यप्रदेश आकर यहां की चुनावी रणनीति को समझना भी इसी प्लान का हिस्सा बताया जा रहा है। मोदी-शाह के पास जो रिपोर्ट पहुंची है, उसमें बताया गया है कि मध्यप्रदेश में पार्टी के भीतर खींचतान है। कार्यकर्ता भी नाराज हैं। ऐसे में इस बार पार्टी के लिए यहां कार्यकर्ता ही मुश्किल खड़ी कर सकते हैं।

शाह के साथ बैठक में केंद्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव, अश्विनी वैष्णव, ज्योतिरादित्य सिंधिया, नरेंद्र सिंह तोमर, सीएम शिवराज सिंह चौहान, बीजेपी प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय मौजूद रहे। करीब 4 घंटे तक शाह ने मध्यप्रदेश के नेताओं से यहां की मैदानी स्थिति का फीडबैक लिया है।

पार्टी रणनीतिकारों का कहना है कि शाह ने बैठक में सबसे साफ कह दिया है कि पार्टी के भीतर किसी भी तरह की खींचतान बर्दाश्त नहीं की जाएगी। टिकट उन्हें ही मिलेंगे, जिनकी रिपोर्ट ग्राउंड पर पॉजिटिव मिलेगी। यानी जिनके जीतने की संभावना होगी।

मोदी-शाह की टीम बना रही हर विधानसभा की कुंडली

मध्यप्रदेश में मोदी शाह की टीम ने सर्वे और फीडबैक का काम शुरू कर दिया है। भोपाल में 200 से ज्यादा लोगों की टीम 24 घंटे काम कर रही है। ऐसे ही हर विधानसभा क्षेत्र में फील्ड टीम भी तैनात है। ये वहां ग्राउंड जीरो पर सरकार से नाराजगी के मुद्दे समझ रहे हैं। इसके अलावा ये भी समझ रहे हैं कि वहां वर्तमान जनप्रतिनिधि के बारे में लोगों की क्या राय है? जाति के क्या समीकरण हैं?

कांग्रेस के कौन-कौन उम्मीदवार हो सकते हैं? उनके खिलाफ भाजपा के कौन से उम्मीदवार प्रभावी हो सकते हैं? यानी हर विधानसभा क्षेत्र की अलग कुंडली बन रही है, जिसमें ये बताया जाएगा कि वहां किस आधार और वर्ग के उम्मीदवार के जीत की संभावना बनेगी? इस सबके अलावा ये भी पता किया जा रहा है कि सरकार से नाराजगी के मुद्दे क्या हैं? इन्हें कैसे दूर किया जा सकता है?

अभी तक की रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता कम नहीं हुई है। यही वजह है कि विधानसभा चुनाव में मोदी के चेहरे को प्रोजेक्ट किया जा रहा है।

एमपी पर मोदी का इतना फोकस क्योंकि यह छिटका तो लोकसभा चुनाव पर भी असर होगा

दरअसल, यही वो सवाल है जिसके जवाब में मोदी को खुद एमपी के मैदान में उतरना पड़ रहा है। हिंदी भाषी मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में होने वाले चुनावों में भाजपा के लिए सबसे अहम एमपी ही है।

एमपी में (कमलनाथ सरकार के 15 महीने छोड़कर) बीते 17 साल से भाजपा काबिज है। यदि यहां भाजपा को झटका लगता है तो इसके सेंटिमेंट्स लोकसभा चुनाव तक बने रहेंगे। यही वजह है कि भाजपा का सबसे ज्यादा फोकस मध्यप्रदेश पर है।

राजस्थान की रिपोर्ट भाजपा के लिए बहुत खराब नहीं है। वहां 16 जुलाई से पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्‌डा पहुंच रहे हैं। नड्‌डा राजस्थान की अलग रणनीति बनाएंगे। छत्तीसगढ़ में भाजपा को बहुत उम्मीद नहीं है।

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