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- Construction Of Achleshwar Temple Entangled In Government Process, Devotees Will Be Troubled Again In Sawan
ग्वालियर39 मिनट पहलेलेखक: अभिषेक द्विवेदी
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शहर के आस्था के केंद्र अचलेश्वर मंदिर का निर्माण सरकारी प्रक्रिया में उलझकर रह गया है।
शहर के आस्था के केंद्र अचलेश्वर मंदिर का निर्माण सरकारी प्रक्रिया में उलझकर रह गया है। यही कारण है कि 2018 में शुरू किए गए निर्माण को दो साल में पूरा होना था, लेकिन पांच साल बाद भी काम पूरा नहीं हो पाया है। भुगतान न होने से निर्माणकर्ता कंपनी ने काम बंद कर दिया है। अधूरे निर्माण के दौरान सर्वाधिक परेशानी यहां आने वाले श्रद्धालुओं को हो रही है। न तो मंदिर के गर्भगृह में उनके आने-जाने की व्यवस्था है और न ही यहां बैठकर पूजा करने की।
सावन के महीने में यहां आने वाली भीड़ को व्यवस्थित रूप से दर्शन कराने के लिए भी मंदिर प्रबंधन के इंतजाम नाकाफी साबित होंगे। नाराज श्रद्धालुओं का कहना है कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर का निर्माण कार्य 5 अगस्त 2020 में शुरू हुआ था।
यह इस साल दिसंबर तक बनकर तैयार हो जाएगा, लेकिन अचलेश्वर का निर्माण कब पूरा होगा कहना मुश्किल है। खास बात यह है कि पहले मंदिर प्रबंधन के आपसी विवाद के कारण मामला न्यायालय में गया। न्यायालय ने पहले यहां रिसीवर नियुक्त किया और बाद में इसके प्रबंधन की जिम्मेदारी कलेक्टर को दे दी। कलेक्टर ने मंदिर की व्यवस्थाओं के लिए चार सदस्यीय समिति बना दी। समिति ने इस मामले में कोई रुचि नहीं ली और निर्माण कार्य पर ब्रेक लग गया।
भुगतान के चक्कर में अटका मामला
मंदिर निर्माण के लिए वर्ष 2017 में सुदर्शन इंजीनियरिंग वर्क्स से अचलेश्वर न्यास का अनुबंध हुआ। निर्माण लागत 3.11 करोड़ रुपए तस हुई। इसके साथ ही जीएसटी की राशि के 18 फीसदी के हिसाब से लगभग 55 लाख रुपए का भुगतान और किया जाना था। इसके लिए निर्माणकर्ता फर्म को अब तक लगभग 2.60 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। इसमें 41 लाख रुपए जीएसटी की राशि भी शामिल है।
फर्म संचालक के अनुसार चूंकि काम अंतिम चरण में है, तीन माह का काम और बचा है, इसलिए हमने 90 लाख रुपए के भुगतान की मांग की थी, लेकिन जिला प्रशासन की समिति ने इस मामले में कोई रुचि नहीं ली। मजबूरी में हमने होली से काम बंद कर दिया।
गर्भगृह में गिट्टियां होने से श्रद्धालु हो रहे परेशान
मंदिर परिसर में गर्भगृह के चारों ओर फर्श का निर्माण कार्य न होने से उसमें से गिट्टियां निकल रही हैं, जिससे श्रद्धालुओं को चलने में परेशानी आती है। श्रद्धालुओं को जल चढ़ाने में दिक्कत आती है। मंदिर चारों तरफ से खुला है। अभी मंदिर के गर्भगृह के आसपास भराई कर उसमें ग्रेनाइट पत्थर या टाइल्स लगना है। साथ ही ऊपर गुम्बद बनना है और चारों कोनों पर नंदी विराजमान होने हैं। निर्माण कार्य अधूरा होने के कारण धूप और बारिश की आड़ नहीं हो पाई है। न ही मंदिर में लाइटों की प्रॉपर व्यवस्था है।
शिवरात्रि से पहले खुली थी दानपेटी
अचलेश्वर मंदिर की दानपेटी शिवरात्रि से पहले खुली थीं। शिवरात्रि को श्रद्धालुओं ने जो दान राशि चढ़ाई थी, वह इन पेटियों में बंद है। उस दौरान पिंडी पर चढ़ाई गई राशि में से कुछ राशि पानी में भीग भी गई थी। इसे देखते हुए मंदिर के पंडितों का कहना है कि पेटी खोल लेनी चाहिए। साथ ही यह भी देख लेना चाहिए कि कहीं इसमें 2000 रुपए के नोट तो नहीं है। अगर नोट बंद हो गए उसके बाद पेटी खुली तो कौन जिम्मेदार होगा।
भुगतान को लेकर दो पक्षों में है मतभेद
“मंदिर निर्माण के भुगतान को लेकर मंदिर के ही दो पक्षों में मतभेद है। एक पक्ष का मानना है कि काम से ज्यादा भुगतान हो गया है और दूसरा पक्ष जल्दी भुगतान कराकर निर्माण पूरा कराने की बात कह रहा है। मामला उलझा हुआ है इसलिए तकनीकी समिति से जांच कराने के बाद ही इसमें कोई निर्णय लिया जाएगा।”
-अक्षय कुमार सिंह, कलेक्टर, ग्वालियर
“हम तेजी से काम पूरा करा रहे थे, लेकिन बीच में कोरोना काल के दौरान लगभग दो साल काम बंद रहा। उसके बाद भी काम पूरा हो जाता, लेकिन भुगतान की समस्या सामने आने लगी। हमने पिछले साल 90 लाख के भुगतान की बात की थी, लेकिन अभी तक नहीं मिला। मजबूरी में होली से हमने काम बंद करा दिया। भुगतान हो जाए तो तीन माह में काम पूरा हाे सकता है।”
-जगदीश मित्तल, संचालक, सुदर्शन इंजीनियरिंग वर्क्स
“इस बार दो माह के श्रावण मास रहेंगे।कांवरियों के साथ यहां नियमित आने वाले श्रद्धालुओं को भी परेशानी होगी। इसलिए कलेक्टर से मिलकर मांग की है कि निर्माण कार्य जल्द से जल्द शुरू कराया जाए।”
-हरिदास अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष, अचलेश्वर ट्रस्ट
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