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शिवांगी सक्सेना (भोपाल)12 मिनट पहले

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दो मई को भोपाल की दिव्या शर्मा ने इंदौर के अर्पित अस्पताल में दम तोड़ दिया। यहां वो वजन कम कराने के लिए सर्जरी कराने आई थी। दिव्या की शादी सॉफ्टवेयर इंजीनियर अंकित मिश्रा से अगस्त में होनी थी। 29 वर्षीय दिव्या का वजन 90 किलो था, वो घटाकर इसे 80 किलो तक करना चाहती थी। बढ़े वजन को लेकर वो परेशान रहती थी।

दिव्या कहती थी कि शादी के दिन वो सुंदर दिखना चाहती है। उसने शॉप पर जाकर शादी के लिए कई लहंगे ट्राय किए थे। वजन कम करने के लिए उसने जिम जॉइन कर लिया था, लेकिन तेजी से नतीजे नहीं मिलने के कारण वो निराश थी। ऐसे में दिव्या ने वजन कम करने दूसरा तरीका सोचा। वो इंटरनेट पर सर्च करने लगी तो पता चला कि सर्जरी के लिए बॉडी फैट को कम करके दुबला हुआ जा सकता है। मार्च में दिव्या ने तय किया कि वो सर्जरी कराएगी। इंटरनेट पर सर्चिंग के दौरान उसे इंदौर के अर्पित अस्पताल का नंबर मिला। उसने अस्पताल के डॉ. सुमित जैस्वाल से संपर्क किया।

डॉ. सुमित की कंसलटेंट आफरीन जीनत ने दिव्या को लिपोसक्शन सर्जरी के बारे में जानकारी दी। दिव्या के परिवार का आरोप है कि जीनत कई बार दिव्या को कॉल और मैसेज करके सर्जरी के लिए उकसाती थी। सर्जरी कराने के लिए 2 मई की सुबह दिव्या, अपने मंगेतर अंकित और छोटे भाई धनंजय शर्मा के साथ ट्रेन से इंदौर गई थी।

दिव्या की मां मंजुलता शर्मा का रो-रोकर बुरा हाल है। उनको बेटी के जाने का गहरा सदमा लगा है। दो महीने बाद बेटी की शादी थी। अशोका गार्डन की लड़की दिव्या शर्मा पंजाब नेशनल बैंक में बतौर ट्रेनर काम करती थी। घर दिव्या की कमाई से ही चलता था। मां ने खुद को संभालकर दैनिक भास्कर से बात की।

मां मंजुलता शर्मा बताती हैं कि दिव्या को सुंदर दिखने का शौक था। उसकी शादी अंकित मिश्रा से पक्की हो गई थी। दोनों की फोन पर खूब बातें होती थीं। कुल मिलाकर शादी से पहले ही अच्छी अंडरस्टैंडिंग हो गई थी। वो हमारे घर की अकेली कमाने वाली थी। उसके पास अर्पित अस्पताल की कंसलटेंट आफरीन जीनत का कॉल रोज आता था। वो मुझसे सलाह लेती थी तो मैंने भी कह दिया कि एक बार डॉक्टर के पास जाकर इस सर्जरी की जानकारी ले ले। उसने मुझे बताया था कि अभी केवल जांच होगी। ये भी बताया था कि सर्जरी में कोई रिस्क होगा तो ऑपरेशन के लिए मना कर देंगे। सर्जरी के दो दिन बाद ही अंकित और दिव्या उसके मामा के घर करोली जाकर शादी की डेट फिक्स करने वाले थे।

दो महीने से रोज सर्जरी के लिए फोन करते थे अस्पताल वाले

अर्पित अस्पताल वाले दो महीने से दिव्या को रोज फॉलो कर रहे थे। दिव्या ने लिपोसक्शन सर्जरी की जानकारी हासिल करने के लिए अर्पित अस्पताल में कॉल किया था। तब से वो दिव्या के पीछे पड़ गए थे। अर्पित अस्पताल वालों ने दिव्या की शादी का पॉइंट पकड़ लिया था। वे बार-बार उसे इंदौर ऑपरेशन करवाने के लिए बुलाते थे। कंसलटेंट जीनत लगातार दिव्या को वाट्सऐप पर मैसेज करती थी। उस पर दबाव डालती थी कि दिव्या का वजन बहुत ज्यादा है और उसे शादी से पहले इसे कम करवाना चाहिए। वह अपने हिप्स और बाजुओं से चर्बी कम करवाना चाह रही थी। दिव्या और अंकित ने फैसला लिया कि वो ये सर्जरी कराना चाहते हैं।

हम जांच के लिए गए थे, लेकिन डॉक्टर ने कहा- आज ही ऑपरेशन करना होगा

दिव्या के भाई धनंजय शर्मा ने बताया कि हम तीनों 2 मई की रात ट्रेन से इंदौर रवाना हो गए। हम केवल जानकारी लेने और डॉक्टर सुमित जैस्वाल से मिलने गए थे जो दिव्या का ट्रीटमेंट करने वाले थे। डॉ. सुमित जैस्वाल ने कहा कि ऑपरेशन आज ही करना है। हमें बताया गया कि यह बहुत छोटी सी सर्जरी है। इंजेक्शन के जरिए फैट पिघलाकर बाहर निकाला जाएगा। दो दिन के बाद मरीज खुद उठकर घर जा सकेगा, जबकि हमें केवल जांच और टेस्ट के लिए बुलाया गया था। वहां पहुंचकर डॉक्टर सुमित ने हम पर ऑपरेशन करवाने के लिए दबाव बनाया।

आगे की कहानी हमें दिव्या के मंगेतर अंकित शर्मा ने बताई। अंकित बैंगलोर की आईटी कंपनी में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। साल 2014 के दौरान अंकित और दिव्या की मुलाकात हुई। उस समय दोनों पीएनबी में काम करते थे। दोनों अच्छे दोस्त बन गए और उन्होंने साल 2023 के अगस्त में शादी करने का प्लान किया था।

दिन हो या रात कभी भी कर देते थे फोन

अर्पित अस्पताल की आफरीन जीनत दिव्या को रात-दिन वाट्सऐप पर मैसेज किया करती थी। उसे रात को किसी भी समय कॉल कर दिया जाता था। दिव्या प्रभावित हो गई थी। हमें यह कहकर इंदौर बुलाया गया था कि उन्हें दिव्या की बॉडी की जांच करनी है। उसका वजन तोलकर और कुछ टेस्ट करके ट्रीटमेंट बताया जाएगा। दिव्या का दिमाग भी फिर गया था। मैंने कहा था कि डॉक्टर से दवाई देने के लिए कहो या योगा कर सकती हो, लेकिन उसके सिर पर सर्जरी का भूत सवार हो गया था। उसका मन था कि शादी के दिन वो पतली दिखाई दे। मेरे घर में मेरी बहन का वजन भी ज्यादा है, लेकिन हमें कभी इस से दिक्कत नहीं थी।

सुबह 10 बजे : अभी ही ऑपरेशन करना नहीं तो डॉक्टर विदेश चले जाएंगे

सुबह 10 बजे को बताया गया कि सर्जरी आज ही करनी है वरना डॉक्टर विदेश चले जाएंगे। उन्होंने दिव्या के मंगेतर अंकित को विश्वास दिलाया कि सर्जरी में कोई जोखिम नहीं है। सर्जरी में 4 घंटे लगेंगे। अंकित बताते हैं कि मैं तुरंत पास ही के एटीएम से जाकर पैसे निकालकर लाया और सर्जरी के लिए अस्पताल में एक लाख बीस हजार रुपए जमा करवा दिए। सुबह 11:30 बजे दिव्या को ऑपरेशन थिएटर में ले गए। हमारे सामने दिव्या से कोई फॉर्म साइन नहीं करवाया था। ऑपरेशन शुरू होने से कुछ देर पहले ऑपरेशन थिएटर में उसे कुछ पेपर साइन करने को कहा।

दोपहर 12:30: डॉक्टर ने कहा- सर्जरी से पहले ही दिव्या को अटैक आया और वो मर गई

दोपहर के 12:30 बज रहे थे। डॉक्टर ने कहा- हमने सर्जरी शुरू नहीं की और दिव्या को अटैक आ गया है। मुझे ऑपरेशन थिएटर में बुलाया। मैंने और धनंजय ने दिव्या के शरीर को देखा। हम चौंक गए। दिव्या बेड पर फ्लैट पड़ी हुई थी। उसके हाथ-पैर नहीं हिल रहे थे, वो जवाब नहीं दे रही थी, वो अर्पित अस्पताल में ही मर गई थी।

डॉक्टर और स्टॉफ घबराया हुआ था। हमें गुमराह किया गया और तुरंत एक किलोमीटर दूर नक्षत्र अस्पताल में हार्ट स्पेशलिस्ट के पास रेफर कर दिया गया। हमें एम्बुलेंस से वहां पहुंचा दिया गया, वहां पहुंचकर दोपहर 3 बजे हार्ट अटैक बताकर दिव्या को मृत घोषित कर दिया गया। उसका पोस्टमॉर्टम भी नहीं होने दिया गया। अर्पित अस्पताल ने तुरंत अपनी तरफ से एम्बुलेंस गाड़ी करवाकर डेड बॉडी भोपाल भिजवा दी, जबकि मुझसे और धनंजय से कहा गया कि तुम दोनों की हालत खराब है। यहां रुककर भी क्या करोगे।

जब ऑपरेशन ही नहीं हुआ तो बॉडी में छेद कैसे हुए

3 मई की सुबह दिव्या का शव उसके परिवार को मिला। परिवार का आरोप है कि शव संदिग्ध हालत में घर पहुंचा। सबसे पहले शव को दिव्या की ताई रजनी शर्मा ने देखा था। उन्होंने बताया कि जब मृत शरीर घर आया दिव्या का चेहरा हरा-नीला हो रखा था। उस लड़की के पेट पर तीन छेद थे। उसमे रुई घुसी हुई थी। कुछ समय बाद उसके मुंह और नाक से खून बहने लगा। मैंने अपने हाथ से छेदों के अंदर से रुई निकाली। पूरे कमरे में खून बहने लगा।

प्रशासन ने मामला दर्ज किया

इस पूरे मामले के बाद दिव्या के परिवार ने अर्पित अस्पताल के डॉ. सुमित जैस्वाल और उनकी टीम पर एफआईआर दर्ज कराई है। एफआईआर के अनुसार परिवार का दावा है कि सुमित जैस्वाल और उनकी टीम की लापरवाही के कारण दिव्या की मौत हो गई। अपर कलेक्टर राजेश राठौड़ ने मामले का तुरंत संज्ञान लिया और मामले की गंभीरता को समझते हुए जांच के निर्देश दे दिए हैं। इस मामले पर हमने डॉ. सुमित जैस्वाल से संपर्क करने की कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने हमारे सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया।

हिप एरिया में रिस्क हमेशा सबसे ज्यादा

इस पूरे मामले पर हमने एक्सपर्ट्स से बात की। भोपाल के प्लास्टिक और कॉस्मेटिक सर्जन डॉ. विशाल रामपुरी ने दैनिक भास्कर को बताया कि दो तरह की महिलाएं इस सर्जरी को करवाती हैं। एक वो जिनकी प्रेगनेंसी के बाद वजन बढ़ गया हो और डाइट के जरिए वजन कंट्रोल नहीं कर पा रहीं। दूसरी वो जो सुंदर दिखना चाहती हैं। इसकी भी एक लिमिट है। एक बार में 6 से 8 लीटर से अधिक फैट को लाइपोस्कट नहीं किया जा सकता। मरीज की जांच की जाती है। टेस्ट होते हैं, जिसके बाद ही सर्जरी के लिए आगे बढ़ा जाता है। लिपोसक्शन रिस्की सर्जरी नहीं है, लेकिन इसके लिए अनुभवी सर्जन होना जरूरी है। फैट हार्ट तक पहुंच सकता है, जिसके कारण अटैक आ सकता है। हर सर्जरी में 5 से 10 प्रतिशत रिस्क रहता ही है। हम रिस्क को कम करने के सभी प्रीकॉशन लेते हैं।

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