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जबलपुरएक घंटा पहले

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मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर में बुधवार को डॉक्टरों की हड़ताल के बीच एक शर्मसार करने वाली घटना सामने आई। जबलपुर जिला अस्पताल में एक मरीज की मौत हो गई और घंटो तक उसका शव अस्पताल परिसर में पड़ा रहा। ताज्जुब की बात तो यह है कि स्वास्थ्य विभाग के किसी भी व्यक्ति ने शव को उठवाने की जहमत नहीं उठाई इतना ही नहीं कुछ स्वास्थ्य कर्मियों की नजर मृतक पर पड़ने के बावजूद भी उस ओर ध्यान नहीं दिया गया। स्थानीय लोगों की सूचना के बादबुधवार की देर रात गरीब नवाज कमेटी के सदस्य जिला अस्पताल पहुंचे जहां उन्होंने शव को उठाकर शेड के नीचे रखवाया। बताया जा रहा है कि गुरुवार को दिन में अब गरीब नवाज कमेटी ही शव का अंतिम संस्कार करेगी।

जानकारी के मुताबिक मृतक बुजुर्ग गैंगरीन वार्ड में बीमारी से पीड़ित होने के कारण जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। मरीज बुधवार की शाम वार्ड से बाहर आ गया और वही उसकी मौत हो गई। बुजुर्ग का शव रात 11:00 बजे तक अस्पताल परिसर में ही पड़ा रहा, इसकी सूचना स्थानीय लोगों ने पहले दो स्वास्थ्य विभाग को दी लेकिन डॉक्टरों की हड़ताल होने के चलते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया इसके बाद गरीब नवाज कमेटी के सदस्य मौके पर पहुंचे जहां उन्होंने शव को व्यवस्थित ढंग से रखा। गरीब नवाज कमेटी के सदस्य इनायत अली ने बताया कि शव की स्थिति बहुत ही दयनीय हो चुकी थी। हालांकि यह पता नहीं चल पाया है कि मरीज कौन है और कहां का रहने वाला है।

डॉक्टरों की हड़ताल का असर जिला अस्पताल के एक और केस में देखा गया जहां पर की पेट दर्द से पीड़ित एक मरीज घंटों तक 108 में ही पड़ा रहा। मरीज के परिजन आकस्मिक चिकित्सा विभाग में जाकर इलाज की दुहाई दे रहे थे लेकिन नर्सों का कहना था कि डॉक्टर हड़ताल पर है इसलिए कोई इलाज नहीं हो सकता। परेशान मरीज के परिजनों ने घंटों तक इमरजेंसी वार्ड में तैनात स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों से गुहार लगाई जब बात नहीं बनी तो वह मरीज को लेकर निजी अस्पताल चले गए।

रात करीब 12:00 बजे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद ड्यूटी पर लौटे डॉक्टरों ने भले ही हड़ताल वापस करने का ऐलान करते हुए अपने काम पर आ गए हैं लेकिन डॉक्टर का गुस्सा अभी भी बरकरार है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद हड़ताल वापस कर काम पर लौटे डॉक्टरों के बीच एक चर्चा सामूहिक इस्तीफे को लेकर भी चल रही है। डॉक्टरों का कहना है आगे की स्थिति को लेकर संगठन के बीच में बात जारी है, संगठन जो भी फैसला लेगा उस हिसाब से निर्णय किया जाएगा।

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