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जबलपुर37 मिनट पहले
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अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेश भर के डॉक्टरों की राज्य सरकार से हो रहीं बात को आखिरकार विराम लग गया है। डॉक्टरों ने आर-पार की लड़ाई का मन बनाते हुए आज बुधवार से अनिश्वितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया है। मध्यप्रदेश के 13 मेडिकल कॉलेज के करीब दस हजार डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं। जबलपुर नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कालेज के करीब साढ़े चार सौ डॉक्टर सहित जिला अस्पताल, लेडी एल्गिन और स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थ 180 डॉक्टर भी हड़ताल पर चले गए है। डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने से मरीजों के लिए इमरजेंसी, ट्रॉमा, और ICU (इंटेसिव केयर यूनिट) में प्रशासन ने एनएचएम , रिटायर्ड और आयुष डॉक्टरों को तैनात किया है, इसके अलावा निजी अस्पतालों से भी संपर्क किया गया है।
आज से शुरू हुई डॉक्टरों की हड़ताल का असर महाकौशल अंचल की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ेगा। जबलपुर कमिश्नर अभय वर्मा ने छुट्टी पर गए सभी डॉक्टरों के अवकाश कैसिंल कर दिए हैं और तत्काल काम पर लौटने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही निजी अस्पतालों को निर्देश दिए गए है कि इमरजेंसी में गंभीर मरीजों के इलाज के लिए तैयार रहें। जबलपुर कलेक्टर सौरभ कुमार सुमन ने भी cmho डॉ संजय मिश्रा को निर्देश दिए है कि आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहें। जबलपुर जिले में करीब 82 आयुष डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है जो कि मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में तैनात रहेंगे।

अनिश्चित कालीन हड़ताल पर आए डॉ नीलम टोप्पो का कहना है कि राज्य सरकार से हमारी विभिन्न मांगों को लंबे समय से बात चल रहीं है, हर बार आश्वासन मिलता है। अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी है लेकिन नियुक्तियां नहीं की जा रही है। स्वास्थ्य सेवाओं को जानबूझकर खराब करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि डॉक्टर चाहते हैं कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रयास किए जाए। इन व्यवस्थाओं को अफसरशाही से मुक्त किया जाए। यही कारण है कि आज से जबलपुर सहित पूरे मध्य प्रदेश के डॉक्टर हड़ताल पर है। मध्यप्रदेश के सभी डॉक्टरों ने अपनी मांगों को लेकर सोमवार को काली पट्टी बांधकर ड्यूटी की, मंगलवार को दो घंटे ओपीडी बंद की जिसका असर भी स्वास्थ्य सुविधाओं पर देखने को मिला।

प्रदेश में डॉक्टरों की हड़ताल को देखते हुए संभाग कमिश्नर अभय वर्मा ने इमरजेंसी में सभी डॉक्टरों के ग्रीष्मकालीन छुट्टी निरस्त कर दी हैं। अवकाश निरस्त होने से डॉक्टर को वापस लौटना पड़ेगा और बताना भी पड़ेगा कि वह काम करेंगे या हड़ताल में शामिल होंगे। मध्य प्रदेश में 10,000 से ज्यादा सरकारी डॉक्टर हड़ताल की राह पर हैं। बुधवार से डॉक्टर काम बंद हड़ताल पर आ गए हैंं। इससे स्वास्थ्य सेवाएं चरमराने लगेंगी। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, सागर सहित तमाम मेडिकल कॉलेज वाले शहरों में हालात बिगड़ने की पूरी संभावना है।
क्या है DACP
डॉक्टरों की डीएसीपी के जरिए समय-समय पर पदोन्नति होती है। वेतनवृद्धि और अच्छा करियर बनाने के लिए DACP में बेहतर अवसर मिलते हैं। ये पॉलिसी साल 2008 के बाद देश के कई राज्यों में लागू हो चुकी है, जबकि, 14 साल के बाद भी मध्य प्रदेश में अभी तक इसे लागू नहीं किया गया है। ये नीति लागू न होने की वजह से डॉक्टरों की नाराजगी आंदोलन का रूप ले रही है।
फैक्ट फाइल
मेडिकल कॉलेज – 01
बेड – 1700
गंभीर मरीज – 200
हड़ताल पर डॉक्टर – 450
ऑपरेशन टाले गए – अभी कोई नहीं
आयुष डॉक्टर मिले – 50
जिला अस्पताल – 01
हड़ताल पर डॉक्टर – 180
बेड – 300
आयुष डॉक्टर मिले – 32
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